6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद गिराने वाले कारसेवकों के लिए हिन्दू महासभा ने की बड़ी मांग

अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद वि’वादि’त स्थल पर राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के 72 घंटे बाद अखिल भारत हिंदू महासभा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर बाबरी मस्जिद गिराने वाले कारसेवकों के खिला’फ चल रहे आ’पराधि’क मामलों को वापस लिए जाने की मांग की है। बता दें इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, हिंदू महासभा के अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि की तरफ से यह चिट्ठी लिखी गई है।

वही हिंदू महासभा ने 6 दिसंबर 1992 में मा’रे गए कारसेवकों को ‘शहीद’ का दर्जा दिए जाने की मांग भी की है। हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि ने इस सम्बंद में गृहमंत्री अमित शाह व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी पत्र भेजा है। 12 नवंबर को लिखे गए पत्र में कहा गया है की जब यह स्पष्ट हो गया है कि रामलला का मंदिर क्षेत्र अयोध्या में निर्विवादित है, तो यह भी स्पष्ट हो गया है कि इसके ऊपर बना गुंबद मंदिर का गुंबद था, न की किसी काल्पनिक मस्जिद का।

बता दें 6 दिसंबर, 1992 को देश भर से लाखों की तादाद में कारसेवक अयोध्या पहुंचे जिनमे कई भाजपा के दिग्गज नेता शामिल थे लाखो कारसेवकों ने अयोध्या पहुंचकर बाबरी मस्जिद को गिरा दिया था। उस दिन उ’ग्र भी’ड़ ने कुछ ही घंटों में मस्जिद के ढांचे को गिरा दिया था। जिससे देशभर में सां’प्रदायि’क दं’गे हुए थे और कई लोगों की जा$न गई थी। जिसके बाद सरकार ने कई कारसेवकों के खिला’फ मुकदमें दर्ज किए थे।

आपको बता दें जिन लोगों के खिला’फ केस दर्ज हुए थे, उनमें से 47 भाजपा नेता और सैंकड़ों कारसेवकों के नाम शामिल हैं। जो लोग इस मामले में आरोपी हैं उनमें भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, उमा भारती, और मुरली मनोहर जोशी जैसे बड़े नाम शामिल है। इस मामले में अप्रैल, 2020 तक फैसला आने का अनुमान है।

6 दिसंबर, 1992 को क्या हुआ था उस दिन

विश्व हिंदू परिषद, शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने 6 दिसंबर, 1992 को अयोध्या पहुंचकर मस्जिद को ढ’हा दिया था। माना जाता है कि बाबरी विध्वंस की नींव साल 1990 में भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी द्वारा निकाली गई रथयात्रा के साथ ही बन गई थी। 6 दिसंबर, 1992 को सुबह के करीब भाजपा और विहिप के कुछ नेताओं ने वि’वा’दित ढां’चे के पास पहुंचकर पूजा-अर्चना की थी। इन नेताओं में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी के साथ कई संत साधू भी शामिल थे।

वही 6 दिसंबर, 1992 की दोपहर को कुछ उ’ग्र कारसेवको ने सुरक्षा घेरा तो’ड़कर बाबरी मस्जिद के गुंबद तक पहुंच गए और इसके साथ ही कारसेवकों की भी’ड़ ने मस्जिद को गिराना शुरु कर दिया।

अब वर्षो पुराने इस मामले पर बीती 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। जिसके मुताबिक कोर्ट ने विवा’दि’त स्थल पर रामलला विराजमान का अधिकार बताया है। साथ ही कोर्ट ने सरकार को 3 माह में ट्रस्ट बनाकर मंदिर का निर्माण शुरु करने के निर्देश दिए हैं। वही कोर्ट ने मस्जिद के लिए भी अयोध्या में 5 एकड़ जमीन मुस्लि’मों को दिए जाने के आदेश दिए हैं।

साभार: जनसत्ता