दर-दर भटक रहे, मोदी सरकार के खिलाफ कोर्ट जाने वाले CBI के पूर्व चीफ आलोक वर्मा को नहीं मिला…

नई दिल्ली: कभी देश के सबसे ताकतवर पुलिस अधिकारी माने जाने वाले सीबीआइ के पूर्व महानिदेशक आलोक वर्मा पिछले कुछ महीनों से इधर उधर भटकते नज़र आ रहे। शायद सीबीआई के पूर्व चीफ को मोदी सरकार के खिलाफ अदालत जाने का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। आलोक वर्मा भले ही रिटायर्ड हो गए हों लेकिन उन्हें अभी तक रिटायरमेंट के बाद जीपीएफ समेत अन्य बेसिक रिटायरमेंट बेनिफिट पूरा नहीं मिला है। जिसके चलते आलोक वर्मा यहाँ वहाँ घूमते नज़र आ रहे है।

आपको बता दें 1979 बैच के आइपीएस अधिकारी वर्मा की सेवा अवधि के सभी लाभ रोक लिए गए हैं। एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए उन्होंने सीबीआइ प्रमुख पद से हटाने के सरकार के फैसले को कोर्ट में चुनौती दी थी। गृह मंत्रालय के 14 अक्टूबर के एक गोपनीय पत्र से पता चला है कि सरकार ने वर्मा के जीपीएफ एवं अन्य लाभ को रोक लिया है।

आलोक वर्मा पिछले कई महीनों से एक जगह से दूसरी जगह चक्कर काट रहे हैं। वर्मा ने सरकार की तरफ से सीबीआई प्रमुख के पद से खुद को हटाए जाने के फैसले को अदालत में चुनौती भी दी थी। इसके बाद सरकार ने अभूतपूर्व कदम उठाते हुए उनकी पिछली सर्विस के लाभ से वंचित कर रखा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्रीय गृहमंत्रालय के पत्र के अनुसार सरकार ने आलोक वर्मा के अनधिकृत रूप से छुट्टी पर जाने को सरकारी सेवा के नियमों के तहत गंभी’र उल्लंघन माना है। इस वजह से आलोक वर्मा का जीपीएफ समेत अन्य लाभों को रोक दिए गए है।

वही गृह मंत्रालय की तरफ से आलोक वर्मा के 11 जनवरी से 31 जनवरी तक की अवधि में अनुपस्थित रहने के मुद्दे को देखा जा रहा है और इस संबंध में फैसला लिया जाएगा। अन्य शब्दों में कहें तो आलोक वर्मा की इस छुट्टी को सरकार सर्विस ब्रेक के रूप में देख रही है। इस वजह से ही उन्हें रिटायरमेंट के बाद के लाभों से अभी वंचित रखा गया है।

खबर आई कि वर्मा ने अपने पद का दुरुपयोग कर अपने अधीनस्थ अधिकारी राकेश अस्थाना के खिलाफ कथित रूप से झूठी एफआईआर दर्ज कराई। इस पर अस्थाना ने भी वर्मा पर भ्रष्टाचार से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों को कमजोर करने का आरोप लगाया। मीडिया के सूत्रों के हवाले से खबर दी गई है कि वर्मा ने 27 जुलाई को एक पत्र लिखकर सरकार ने अपनी जीपीएफ की राशि जारी करने का आग्रह किया है।

source: jansatta