पूर्व IAS अधिकारी गोपीनाथ ने कहा- अब असंभव नहीं रहा EVM से छेड़छा’ड़, बताई यह बड़ी वजह

पूर्व आईएएस अधिकारी कन्नन गोपीनाथ ने वोटर वेरीफ़ाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल यानी वीवीपैट VVPAT की प्रमाणिकता पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग के दावों को गलत और झूठा ठैराते हुए कहा कि वीवीपैट ने वोटों की हेराफेरी को आसान बना दिया है। बता दें कि जम्मू कश्मीर के लोगों को अभिव्यक्ति की आज़ादी न दिए जाने के मुद्दे पर अपने प्रतिष्ठित पद से इस्तीफा देने वाले गोपीनाथ ने तर्क देते हुए बताया कि कैसे VVPAT कंट्रोल यूनिट जिसमें वोट इलेक्ट्रॉनिक रूप में स्टोर किए जाते हैं से ईवीएम की बैलेट यूनिट जिस पर एक मतदाता अपना वोट डालता है का संपर्क काट देता है।

उन्होंने बताया कि VVPAT एक पर्ची पर निशान और उम्मीदवार के नाम को दिखाता है जिसके लिए एक वोटर ने वोट किया है। यह पर्ची बॉक्स में गिरने से पहले वोटर को 7 सेकंड के लिए दिखाई देती है, फिर बॉक्स में गिरती है जहां इसे गिनती के लिए स्टोर किया जाता है।

बतौर जिला मजिस्ट्रेट, गोपीनाथन को ईवीएम और वीवीपीएटी को संभालने का अनुभव हुआ और उन्हें मशीनों के काम करने के तरीके के बारे में अच्छी तरह से पता किया। इसके बाद गोपीनाथ ने ट्विटर के ज़रिए कहा कि VVPAT की शुरुआत करते हुए, हमने इस आसान प्रक्रिया में कई कमज़ोरियां रखी हैं।

साथ ही उन्होंने बताया कि प्रक्रिया में या गिनती के दौरान हमने इसमें पर्याप्त निरीक्षण नहीं जोड़े। मुझे लगता है कि इस दिशा में काम करने की तत्काल ज़रूरत है ताकि यह प्रक्रिया और अधिक मज़बूत हो सके।

पूर्व आईएएस ने अपने ट्वीट्स के ज़रिए ये समझाने की कोशिश की है कि कैसे VVPAT के ज़रिए बेहद आसानी से हेराफेरी की जा सकती है। उन्होंने कहा कि इससे बचने के लिए ज़रूरी कदम उठाए जाने की बहुत ज़रूरत है।

जानकारी के लिए आपको बता दें कि 2012 बैच के आईएएस अधिकारी कन्नन गोपीनाथ ने जम्मू-कश्मीर के लोगों को अभिव्यक्ति की आजादी न दिए जाने से आहत होकर पिछले महीने इस्तीफ़ा दे दिया था। इस्तीफा देने के बाद गोपीनाथ ने कहा था कि वह सिविल सेवा में इस उम्मीद से शामिल हुए थे कि वह उन लोगों की आवाज बन सकेंगे जिन्हें खामोश कर दिया गया लेकिन यहां, वह खुद की आवाज गंवा बैठे।

साथ ही उन्होंने कहा था कि वह अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता वापस चाहते हैं। वह अपनी तरह से जीना चाहते हैं, भले ही वह एक दिन के लिए ही हो। हालांकि उनके इस्तीफे में कही भी कश्मीर मसले का जिक्र नहीं है।

साभार: जनसत्ता