बिकाऊ मीडिया की करतूत, घड़ी बेचने वाले बेकसूर मुस्लि’म को बताया सं’दि’ग्ध आ’तं’की, अब हो रहा…

कर्नाटक के बेंगलुरु के उप्परपेट पुलिस स्टेशन के बाहर खड़े 60 वर्षी’य मुस्लि’म शख्स रियाज अहमद के चेहरे पर खौ’फ, डर और ‘चिंता की ल’कीरें साफ नजर आ रही थी. रियाज अहमद पुलिस स्टेशन में अपनी शिकायत लेकर पुलिस से गुहार लगाने आए थे. उनकी परेशानी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनकी आवाज तक कांपते हुए निकल रही थी.

रियाज ने झलकती हुई आवाज़ में पूछा कि क्या आप सोच सकते हैं कि मेरी पत्नी और बच्चे इस समय क्या जख्म झेल रहे हैं? अगर कुछ गलत हो गया तो इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा? अगर किसी ने मुझपर हमला कर दिया तो मेरे परिवार का क्या होगा.

 

उन्होंने आगे कहा कि मैं अपने 10 लोगों के परिवार में अकेला कमाने वाला इंसान हूं अगर मुझे कुछ हो जाता है तो उन लोगों का ध्यान कौन रखेगा? दरअसल रियाज के इस डर की वजह था गोदी मीडिया. रियाज अहमद का फोटो कई टेलिविजन चैनलों ने सं’दि’ग्ध आ$तंकी करार देते हुए जारी कर दिया था.

गंगोंडनहल्ली के चंद्रा लेआउट निवासी रियाज अहमद गांधीनगर में फुटपाथ पर घड़ियां बेचने का काम करते है. उनके 7 बच्चे हैं जिनमें से कुछ की शादी हो चुकी है. दो कमरे के किराये के घर में वह अपने परिवार के साथ रहते है उनके परिवार के साथ दो रिश्तेदार महिलाएं और भी रहती हैं.

सोमवार को मजेस्टिक मेट्रो स्टेशन पर सिक्यॉरिटी चेक के दौरान अहमद से पीछे खड़े शख्स ने मेटल डिटेक्टर के बीप करने पर सिक्यॉरिटी चेक से इनकार कर दिया. उससे सिर्फ 30 सेकंड पहले ही अहमद वहां से गुजर कर आए थे. बुधवार की सुबह क्षेत्रीय टीवी चैनलों ने उनका फोटो जारी करते हुए उन्हें सं’दि’ग्ध आ$तंकी बता दिया.

अहमद को इस बारे में एक पड़ोसी ने जानकारी थी. अहमद ने बताया कि वह 30 साल से घड़ियां बेच रहे हैं. वह इसी इलाके में पैदा हुए और बड़े हुए है. उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें संदिग्ध आ’तं’की करार देते हुए प्रचारित कर दिया जाएगा.

उन्होंने बताया कि उनकी मां और पत्नी न्यूज देखने के बाद से ही परेशान हो रही हैं. वहीं उन्हें डर है कि कहीं कोई भीड़ उन पर हमला न दें. उन्होंने पुलिस से मिलकर सब साफ करना जरूरी समझा. उन्होंने डेप्युटी पुलिस कमिश्नर ऑफ पुलिस (वेस्ट) से मिलकर शिकायत दर्ज कराई और टीवी चैनल और मेट्रो के अधिकारियों पर उन्हें बदनाम करने का आरोप लगाया.