हाई कोर्ट ने येदियुरप्पा सरकार को लगाई फ’टकार कहा- जब दूसरी जयंतियां मनाने में ऐतराज़ नहीं तो टीपू जयंती पर क्यों?

बेंगलुरु: कर्नाटक की बीएस येदियुरप्पा सरकार द्वारा टीपू सुल्‍तान की जयंती न मनाने का फैसला हाई कोर्ट तक पहुंच चुका है. हाईकोर्ट ने राज्‍य सरकार से श’ख्त लह’जे में कहा है कि वह अपने इस फैसले पर एक बार फिर से सोचे. बता दें कि इस साल कर्नाटक की बीजेपी सरकार ने फैसला किया है कि वह टीपू जयंती नहीं मनाएगी. हलाकि हर साल कांग्रेस सरकार टीपू की जयंती मनाती आ रही थी. इस मामले पर सुनवाई करते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट ने सरकार को टीपू जयंती पर बैन लगाने के बारे में पुनर्विचार करने का आदेश दिया है।

बता दें कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को कोर्ट ने टीपू जयंती सरकारी खर्चे पर न मनाने के उनके फैसले पर पुनर्विचार करने का आदेश देते हुए हिदायत दी है कि फैसले ऐसे नहीं लिए जाने चाहिए कि वे एकतरफा लगें. कर्नाटक के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अभय श्रीनिवास ओका और न्यायाधीश एसआर कृष्ण कुमार की खंडपीठ ने येदियुरप्पा सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह टीपू जयंती सरकारी खर्चे पर मनाने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करे और जो लोग निजी तौर पर मनाएं उन पर किसी तरह की रोक न लगाई जाए।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद येदियुरप्पा ने 30 जुलाई को टीपू जयंती मनाने पर रोक लगा दी. कर्नाटक हाई कोर्ट ने कहा कि मंत्रिमंडल के इस पर आपना फैसला नहीं लिया. यानी बगैर किसी सलाह- मशविरा के एक दिन में यह निर्णय लिया गया. फैसला ऐसा नहीं होना चाहिए कि वह एकतरफा लगे।

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश देते हुए कहा, जो लोग टीपू सुल्‍तान की जयंती राज्‍य में मना रहे हैं, सरकार को उनकी सुरक्षा के लिए कदम उठाने चाहिए. इस मामले में सुनवाई के दौरान सरकार ने कहा, सरकार ने किसी भी व्‍यक्‍ति विशेष को 10 नवंबर को टीपू सुल्‍तान की जयंती मनाने से नहीं रोका है. लेकिन सरकार ने कहा कि वह पिछली सरकार की तरह टीपू की जयंती नहीं मनाएगी।

गौरतलब है कि 29 जुलाई 2019 को सीएम पद की शपथ लेने वाले मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने अगले दिन 30 जुलाई को टीपू जयंती को रद्द कर दिया. ऐसा लगता होता है कि उन्होंने 2015 और 2016 के इस जयंती को मनाने के पुराने आदेश पर गौर किए बिना फैसला लिया।

बता दें कि बीजेपी विधायक एम अपाचू रंजन ने बेसिक और माध्यमिक शिक्षा मंत्री सुरेश कुमार को एक पत्र लिखा था. इसमें उन्होंने 18वीं सदी में मैसूर पर राज करने वाले शासक टीपू सुल्तान को कन्नड़ विरोधी बताया था. उन्होंने लिखा, इतिहास की किताबों में टीपू सुल्तान का महिमामंडन किया गया है. हमने किताबों में जो इतिहास पढ़ा है, वह पूरा नहीं है. ये पूरी तरह सत्य भी नहीं है।

येदियुरप्पा के सत्ता में आने के बाद ही टीपू सुल्तान जयंती को न मनाने का फैसला किया था. इससे पहले की कांग्रेस सरकार टीपू सुल्तान की जयंती 10 नवंबर को मनाती थी, 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस फैसले पर बहुत बवा’ल मचा था. उत्तर कन्नड़ जिले में इस मुद्दे पर सां’प्रदायि’क हिं#सा भी भड़’क उठी थी।

कांग्रेस जेडीएस सरकार बनने के बाद भी टीपू सुल्तान की जयंती मनाने का सिलसिला जारी रखा गया था, लेकिन जेडीएस ने खुद को इससे अलग रखा था. विधानसभा में इस सरकार के बहुमत खोन के बाद बीजेपी ने सत्ता पर काबिज होते ही पूर्व सरकार का ये फैसला बदल दिया था।

वही कर्नाटक हाईकोर्ट ने दो बातें साफ कर दीं कि जो लोग टीपू जयंती मनाएंगे उनकी हिफाजत की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी. और कोर्ट ने येदिुयुरप्पा के सरकारी खर्च पर टीपू जयंती मनाने पर रोक लगाने से भी मना कर दिया. हालांकि पुनर्विचार का निर्देश येदियुरप्पा को जरूर दिया।