नागरिकता संशोधन एक्ट के विरोध में सरकार ने किया इंटरनेट बंद तो लोगों ने निकाला यह नया तरीका

नागरिकता संशोधन कानून को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन को देखते हुए देश के अलग-अलग जगहों पर इंटरनेट के बंद हो जाने से लोगों को काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। मोबाइल के साथ लैंडलाइन इंटरनेट को भी कंपनियों ने बंद रखा। इससे करोडो उपभोक्ताओ पर असर पड़ा है। लेकिन इस बीच कई ऐसे ऐप हैं। जिसे इसतेमाल कर प्रदर्शनकारियों ने अपने विरोध को कायम रखा।

आपको बता दें कि CAA के विरोध प्रदर्शन के समय सरकार हालात बेकाबू न हो जाए इसलिए जगह-जगह इंटरनेट की सेवाएं बंद कर दी थी, ऐसे में विरोध कर रहे प्रदर्शनकारी हांगकांग विरोध के सीख लेते हुए दो विदेशी ऐप के जरिए एक दूसरे से संपर्क कर रहे है। हलाकि इन ऐप्स को असम विरोध में भी प्रयोग किया गया है।

आखिर ये है क्या ऑफलाइन मैसेजिंग ऐप जैसे कि ब्रिजफी, फायर-चैट दो ऐसे ऐप हैं जिनके इसतेमाल से एक सीमित रेंज में ब्लूटूथ के जरिए संपर्क साधा जा सकता है। यह ऐप एक डिवाइस से दूसरे डिवाइस के बीच एक रेंज तक संपर्क साधने में काफी असरदार है। दरअसल, यह ऐप पियर टू पियर मीश नेटवर्क (पर काम करता हैं और इनके यूसेज और इस्तेमाल के लिए कोई किसी भी मोबाइल नेटवर्क की जरुरत नहीं पड़ती है।

आपको बता दें कि हाल में हुए हांगकांग विरोध से सीख लेते हुए भारत में भी CAA विरोध में भी इन ऐप को बढ़ चढ़कर इस्तेमाल किया गया है। असम, दिल्ली और यूपी में भी इन ऐप्स को इसतेमाल किया गया है।

वही यूएस ऐप इंटेलिजेंस फर्म ऐपोटोपिया की माने तो हाल में ही ब्रिजफी की डाउनलोड और एक्टीव यूजर्स की संख्या में काफी बढ़त देखने को मिली है। ब्रिजफी ऐप पर कंपनी का कहना है कि इसे बनाने का मकसद हिं’सा फैलाना नहीं बल्कि ब्ला’कडा’उन के दौरान लोगों से संपर्क करने है।

बता दें भारत में 12 दिसंबर के बाद जब असम और मेघालय में इंटरनेट बंद किया गया तब इन ऐप्स का डाउनलोड 80 गुना बढ़ा था। देश की राजधानी दिल्ली में भी करीब 30 फीसदी की बढ़त देखने को मिली थी। ब्रिजफी ऐप को सबसे पहले मुंबई स्थित राजनीतिक कार्यकर्ता रुबेन मस्करनहस ने इस ऐप को इस्तेमाल किया था।