महाराष्ट्र का राज्यपाल बीजेपी द्वारा बनाए गए हैं, जो सिर्फ मालिक के हुक्म पर सलामी बजाता है: संजय सिंह

नई दिल्ली: शिवसेना ने सोमवार को दावा किया कि महाराष्ट्र में भाजपा के बिना उसकी सरकार का समर्थन करने के लिए एनसीपी और कांग्रेस समर्थन देने पर सहमत हो गई हैं लेकिन वह राज्यपाल द्वारा तय समयसीमा के पहले इन दलों से समर्थन पत्र नहीं ले सकी वही आदित्य ठाकरे के नेतृत्व में शिवसेना विधायकों का एक दल सोमवार शाम राज्यपाल से मिला और उनसे बाकी प्रक्रियाओं को पूरा कर सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए तीन दिन की और मोहलत मांगी लेकिन राज्यपाल ने इससे ठुकरा दिया।

अब महाराष्ट्र में पिछले कई दिनों से जारी सियासी उथल-पुथल के बीच राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन को मंजूरी दे दी है। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने अपनी सिफारिश में कहा था राज्य में कोई भी दल सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है इसलिए यहां राष्ट्रपति शासन लगाया जाना चाहिए।

बता दें पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई थी। इससे पहले राज्यपाल ने बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी को सरकार बनाने का मौका दिया था। लेकिन शिवसेना द्वारा तीन दिन का और वक्त मांगने पर राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने इससे ठुकरा दिया।

आपको बता दें राज्य में राष्ट्रपति शासन लगने पर तमाम विपक्षी दलों ने राज्यपाल की इस कार्रवाई को न सिर्फ पक्षपाती बताया बल्कि संविधान विरोधी होने का भी आरोप लगा रहे हैं। इसी पर राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने मोदी सरकार पर हम’ला बोला है। उन्होंने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को भाजपा का एजेंट बताते हुए ट्विटर किया है।

आप नेता संजय सिंह ने ट्वीट करते हुए कहा- राज भवन अब “राजा भवन” में तब्दील हो गया है जहाँ खुलेआम लोकतांत्रिक मूल्यों की ह#त्या हो रही है, राज्यपाल भाजपा के द्वारपाल बन गये हैं जिनका काम मालिक के हुक्म पर सलामी बजाना है।

संजय सिंह ने महाराष्ट्र के घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा ने नैतिकता के मायने बदल दिये हैं। अब उनकी नजर में विपक्ष को अनैतिक तरीके से दबाना ही नैतिकता है। अगर वे गोवा में कांग्रेस के विधायकों को गलत तरीके से अपने पाले में कर सत्ता हासिल करते हैं, तो वे उसे ठीक समझते हैं।

जम्मू-कश्मीर में अफजल गुरु को शहीद बताने वाली पीडीपी से समझौता करते हैं, तो वे इसे सही साबित करते हैं, लेकिन शिवसेना और कांग्रेस को आपसी तालमेल बिठाने के लिए कुछ समय लगता है तो उन्हें इसमें अनैतिकता नजर आती है, जो कि गलत है।