महान मुस्लि’म वैज्ञानिक, जिनके अविष्कारों को दुनिया से छिपा दिया गया, जानिए इनके नाम

About Muslim Scientists: मुसलमा’न कहीं भी रहे वो हमेशा अपना परचम बुलंदियों तक ले जाता है, और इतिहास गवाह है देश की आज़ादी में जो भूमिका भारतीय मुसलमा’नों ने निभायी है उसको भुलाया नहीं जा सकता| सच तो ये है कि आज़ादी की लड़ाई में मुसलमा’नों का जितनी संख्या में योगदान उतना किसी और कौम की संख्या का नही है| मुसलमा’नों के खिला’फ साजि’शें पुराने ज़माने से ही चली आ रही हैं.

कुछ साजि’शों को नाकाम कर दिया गया और कुछ कामयाब हो गयीं| आज की इस पोस्ट में आपको कुछ ऐसा ही पढ़ने को मिलने वाला है, जिसमे इतिहास के महान मुस्लि’म वैज्ञानिकों के योगदान को भुला दिया गया, इतना हे नहीं इनकी खोजों को तक दुनिया से छिपाया गया.

Muslim Vaigyanik or unke dwara kiye gaye awishkar

दुनियाभर में मुस्लि’म (Indian Muslim Scientists) वैज्ञानिकों ने जो योगदान दिया उसे एक बड़ी साजि’श के तहत नज़रअंदाज कर उनकी उपलब्धियों को दफन करने की कोशिश की गई. साजि’श में किसी एक मुल्क को ज़िम्मेदार ठहराना बेमानी होगा. लेकिन अमेरिका, रूस जर्मनी, ब्रिटेन और फ़्रांस सहित दुनिया के कई बड़े मुल्कों ने मिलकर मुस्लि’म वैज्ञानिकों द्वारा की गई खोजों पर न सिर्फ पर्दा डाल दिया बल्कि उन वैज्ञानिकों की पहचान को भी छिपाए रखा.

इब्न सीना- इब्न सीना का पूरा नाम अली अल हुसैन बिन अब्दुल्लाह बिन अल-हसन बिन अली बिन सीना है. इनकी गणना इस्लाम के प्रमुख डाक्टर और दर्शिनिकों में होती है|

उनकी गणित पर लिखी 6 पुस्तकें मौजूद हैं जिनमे रिसाला अल-जराविया, मुख्तसर अक्लिद्स, अला रत्मातैकी, मुख़्तसर इल्म-उल-हिय, मुख्तसर मुजस्ता, रिसाला फी बयान अला कयाम अल-अर्ज़ फी वास्तिससमा शामिल हैं.

इब्न सीना

अबू रेहान अल बैरूनी का पूरा नाम अबू रेहान मुहम्मद इब्न अहमद अल बैरूनी है। ये 9 सितंम्बर 973 ई को ख्वारिज्म के एक गाँव बैरून में पैदा हुए। ये बहुत बड़े शोधकर्ता और वैज्ञानिक थे. अल बैरूनी ने गणित, इतिहास के साथ भूगोल में ऐसी पुस्तकें लिखीं हैं.

अल तूसी- इनका पूरा नाम अल अल्लामा अबू जाफर मुहम्मद बिन मुहम्मद बिन हसन अल तूसी है. ये सातवीं सदी हिजरी के शुरू में तूस में पैदा हुए. इन्होने बहुत सारी किताबे लिखीं जिसमे अहम “शक्ल उल किताअ” है. यह पहली किताब थी जिसने त्रिकोणमिति को खगोलशास्त्र से अलग किया.

जाबिर बिन हियान -मुस्लिम रसायन शास्त्री : रसायन शास्त्री कहा जाता है. उसे पश्चिमी देश में गेबर के नाम से जाना जाता है. इन्हें रसायन विज्ञान का संस्थापक माना जाता है. जाबिर बिन हियान पहले व्यक्ति थे जिन्होंने पदार्थ को तीन भागों वनस्पति, पशु और खनिज में विभाजित किया. रासायनिक यौगिकों जैसे कार्बोनेट, आर्सेनिक, सल्फाइड की खोज की|

अल जज़री : अल जजरी अपने समय के महान वैज्ञानिक थे| महान वैज्ञानिक ने अपने समय में इंजीनियरिंग के क्षेत्र में इन्कलाब बरपा कर दिया था. इनका सबसे बड़ा कारनामा ऑटोमोबाइल इंजन की गति का मूल स्पष्ट करना था और आज उन्हीं के सिद्धांत पर रेल के इंजन और अन्य मोबाइलों का आविष्कार संभव हो सका|

इब्न अल हैशम : इब्न अल हैशम का पूरा नाम अबू अली अल हसन बिन अल हैशम है| ये ईराक के एतिहासिक शहर बसरा में 965 ई में पैदा हुए. इन्हें भौतिक विज्ञान, गणित, इंजीनियरिंग और खगोल विज्ञान में महारत हासिल थी|

इब्न अल हैशम ने प्रकाश के प्रतिबिम्ब और लचक की प्रकिया और किरण के निरक्षण से कहा कि जमीन की अन्तरिक्ष की उंचाई एक सौ किलोमीटर है. इब्न अल हैशम ने ही यूनानी दृष्टि सिद्धांत को अस्वीकार करके दुनिया को आधुनिक दृष्टि दृष्टिकोण से परिचित कराया|

अल किंदी : इनका पूरा नाम याकूब इब्न इशहाक अल-किंदी है. इनके पिता कूफा के गवर्नर थे. इन्होने प्रारंभिक शिक्षा कूफ़ा ही में प्राप्त बाद में बगदाद चले गये. अल किंदी ने ही इस्लामी दुनिया को हकीम अरस्तू के ख्यालों से परिचित कराया और गणित, चिकित्सा विज्ञान, दर्शन और भूगोल पर 241 उत्कृष्ट पुस्तकें लिखी.