हज पर जाने वाली महिलाओं के लिए, सऊदी अरब की सरकार ने दिया बड़ा तोहफा

जैसा कि आप सब जानते हैं कि बीते साल सऊदी अरब ने अपने देश के कानून में, सऊदी नागरिकों को सुविधाएं देने के लिए काफी फेरबदल किए थे| इनमें से ज्यादातर बदलाव महिलाओं के अधिकारों को लेकर थे| सऊदी अरब को दुनिया के लोग एक कट्टर छवि के मुस्लिम देश के रूप में जानते हैं| लेकिन यहां हकीकत बिल्कुल उसके उलट है| इस देश में कुछ बातों पर ध्यान देते हुए महिलाओं के हितों की रक्षा हेतु कानून में कई बदलाव किए, सऊदी अरब के इस कदम को दुनियाभर के देशों ने काफी सराहा भी| और सऊदी ने सोशल मीडिया पर दुनिया भर के लोगों से तारीफ भी बटोरी|

सऊदी में फिर एक बार महिलाओं को लेकर एक काम किया है| जिसकी वजह से ये फिर एक बार चर्चा का विषय बन गया है| सऊदी अरब भारतीय महिलाओं के लिए एक ख़ास सुविधा दे रहा है, जो अब से पहले वहां के कानून के हिसाब से नहीं थी|

समाचार एजेंसी तसनीम की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब की सरकार ने महिला हज यात्रियों को बिना मरहम के हज यात्रा करने की इजाज़त दे दी है| अब से पहले दुनिया की किसी भी महिला को यहाँ ये सुविधा मुहैया नहीं थी| ऐसी महिला जिनकी उम्र 45 वर्ष से अधिक होगी, अब वह बिना किसी मरहम के हज यात्रा करने के लिए जा सकती हैं|

लेकिन इसमें भी एहतियात के तौर पर सिर्फ किसी एक महिला के लिए ये इजाज़त नहीं है| उन्हें कम से कम 4 महिला हज यात्रियों का एक समूह बनाना पड़ेगा, फिर यह महिलाएं बिना मरहम के हज पर जा सकेंगी| यहाँ आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यहाँ मरहम उसको कहा जा रहा है कि जिससे महिला की शादी नहीं हो सकती|

आपकी जानकारी के लिए बता रहे हैं, कि हमारे देश की भारत सरकार ने, 2014 के हज यात्रा नियमों में संशोधन के हेतु सऊदी अरब की सरकार के समक्ष एक प्रस्ताव रखा था| जिसमें यह कहा गया था कि 45 साल तक की महिला को मरहम की झंजत से रहत दी जय| उसको बिना मरहम के हज यात्रा पर जाने की इजाजत दे दी जाए| लेकिन वो ऐसे में वे अकेली ना होकर कम से कम 4 हज यात्रियों के समूह में होंगी|

इसके बाद सऊदी ने इस संशोधन पर गौर करने के 5 साल बाद, इसके लिए मंजूरी दे दी है| सूत्रों के अनुसार बताया जा रहा है कि, इस तरह की हज यात्रा में ढील मिलने पर इस साल हज यात्रा के लिए जाने वाली महिलाओं की संख्या तकरीबन 5 गुना तक ज्यादा बढ़ सकती है|

इससे पहले कुछ मुस्लिम महिलाओं के लिए सऊदी अरब जाकर हज यात्रा करना थोड़ा मुश्किल होता था| क्योंकि उन्हें उसके लिए एक मरहम की ज़रुरत होती थी| लेकिन सऊदी अरब और भारत के बीच हुए समझौते के बाद भारतीय महिला हज यात्रियों के लिए यह किसी बड़े तोहफे से कम नहीं है|

आपको बता दें कि दुनिया भर के मुस्लिम जो पैसे से इतने सक्षम हो कि वह हज यात्रा करने का खर्च उठा सकें, उनके लिए कम से कम जीवन में एक बार हज यात्रा करना फ़र्ज़ (ज़रूरी) होता है| लेकिन यहां इस्लामिक कानून के अनुसार एक बात और है, कि हज यात्री कर्ज़ लेकर हज यात्रा ना करें|

और यह भी कि जब वो हज के दौरान जितने दिन अपने घर से बाहर रहता है, उस दौरान आपके परिवार को किसी भी तरह का आर्थिक संकट या उसके जाने की वजह से उसके परिवार को किसी भी तरह की परेशानी ना हो| वरना ऐसे इंसान का हज करना व्यर्थ ही है|

सऊदी अरब का इस तरह से महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना और उनको लेकर बनाए गए कई नियमों में ढील देना यह बदलाव करना इस देश के लिए अच्छे संकेत देता है और दुनिया भर में इस वजह से सऊदी को हमेशा सम्मान की नजरों से देखा जाएगा|