शोधकर्ता: सन 2047 के बाद से हज करना हो सकता है खतरना’क, कैसे? जानिए

हाल ही में हुए एक नए रिसर्च के मुताबिक़ यह पता चला है कि सऊदी के पवित्र मक्का शहर में जलवायु परिवर्तन की वजह से खत’रा हो सकता है। आपको बता दें कि हज इस्लाम के पांच स्तं’भों में से एक है, जिसमें सऊदी अरब में स्थित पवित्र शहर की यात्रा शामिल है। दुनिया की फेमस मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी MIT के शोधकर्ताओं ने यह पता लगाया है कि जलवायु परिवर्तन से बढ़ते जलवायु संकट को मद्देनजर रखते हुए क्षेत्र को असहनीय रूप से गर्म बना दिया जाएगा।

इस विषय के जानकार अब खुली चेताव’नी दे रहे हैं कि यदि वैश्विक तापमान में वृ’द्धि जारी रहती है तो हज यात्रा पर मानव स्वास्थ्य के लिए एक अत्यधिक खत’रा पैदा हो सकता है। दुनिया की लगभग एक चौथाई आबादी यानि 1.8 बिलियन लोग मुस्लि’म हैं और हज यात्रा को उन लोगों के लिए धार्मिक कर्तव्य के रूप में देखा जाता है जो शारीरिक और आर्थिक रूप से सक्षम हैं। वो पांच दिन तक चलने वाले अनुष्ठान में बड़ी मात्रा में समय बाहर खर्च करना और तत्वों के संपर्क में आना शामिल है।

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सिविल और पर्यावरण इंजीनियरिंग के एमआईटी प्रोफेसर एल्फतिह इल्तहिर और दो अन्य लोग रिपोर्ट करते हैं कि हज प्रतिभागियों को जल्द ही खत’रा हो सकता है। जर्नल जियोफिजिकल रिव्यू लेटर्स में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक़ 2019 और 2020 में यह पाया गया कि वे साल के सबसे गर्म महीनों में आए हैं। इस्लामी कैलेंडर सौर कैलेंडर के बजाय चंद्र कैलेंडर पर निर्भर करता है जिसकी वजह से हज हर साल 11 दिन पीछे आ जाता है इसी वजह से हज गर्मियों के महीनो के दौरान कुछ ही साल होता है।

बताया जा रहा है कि यह 2052 के माध्यम से 2047 के दौरान सबसे गर्म महीनों में फिर से होगा और 2076 और 2086 के बीच एक और बार होगा सऊदी अरब के प्रोफेसर एल्फतिह इल्तहिर ने बताया कि जब सऊदी अरब में गर्मियों की बात आती है, तो स्थिति और कठोर हो जाती है और इन गतिविधियों का एक बड़ा हिस्सा बाहर हो जाता है।

हाल ही की जानकारी के मुताबिक़ खबर मिली है कि हज के दौरान इस साल 2,000 से अधिक मुस्लि’मों की मृ’त्यु हुई है इससे पहले 1990 में एक भगदड़ के दौरान 1462 लोगों की मौ’त हो गई, जबकि 2015 में दूसरे ने दावा किया कि 769 लोगों की जा’न चली गई और 934 लोग घायल हो गए थे।

प्रोफेसर एल्फतिह इल्तहिर कहते हैं अगर आप किसी स्थान पर भी’ड़ लगाते हैं, तो मौसम की स्थिति जितनी कठोर होती है उतनी ही अधिक संभावना भी’ड़ घटना’ओं को जन्म देती है। शोध एक मेट्रिक पर लगी हुई होती है जिसे वेट बल्ब तापमान TW के रूप में जाना जाता है जिसे एक गीले कपड़े को थर्मामीटर के बल्ब से जोड़कर मापा जाता है।

यह इस बात का प्रत्यक्ष सूचक है कि पसीना शरीर को कितनी अच्छी तरह से ठंडा कर रहा है। यह वास्तविक तापमान के अनुसार बदल जाता है लेकिन यदि TW 103 ° F से ऊपर बढ़ जाता है तो शरीर अब खुद को ठंडा नहीं कर सकता है। इसको अमेरिकी राष्ट्रीय मौसम सेवा द्वारा खतरनाक के रूप में परिभाषित किया गया है और अगर यह 124 F या इससे ऊपर बढ़ता है तो यह एक अत्यधिक खत’रा बन जाता है।

इस बढ़ते हुए गरम तापमान की वजह से हिट स्टॉक हो सकता है जो मस्ति’ष्क, हृ’द’य, गु’र्दे और मां’सपेशि’यों को नुकसान पहुंचा सकता है। बता दें कि जलवायु परिवर्तन से हर साल गर्मि’यों के उन दिनों में उस जगह की गर्मी में ज्यादा वृ’द्धि होगी जहां क्षेत्र में गी’ला बल्ब का तापमान अत्यधिक खत’रे’ की सीमा से अधिक होगा।