ये है असली हिंदुस्तान की तस्वीर: अपने बीमार मुस्लिम ड्राइवर की तरफ से हिन्‍दू ऑफिसर ने रखा रोज़ा

देश में कुछ विशेष रजनीतिक पार्टियां अपने रजनीतिक हित साधने के लिए समाज में नफरत के बीच बोने में लगी हुई है. यह राजनेता भारत के विभिन्न धर्मों पर पंथों के बीच नफरत की आग लगातार उस पर अपनी रजनीतिक रोटियां सेकने में लगे हुए है. लेकिन देश में भाईचारे की नींव काफी मजबूत है और वह ऐसे कुछ प्रयासों से हिलने वाली नहीं हैं.

ऐसा ही एक ताजा उदहारण महाराष्‍ट्र से सामने आया हैं. सूबे के बुलढाणा में एक हिन्‍दू ऑफिसर ने भाईचारे की एक अनूठी मिसाल पेश की है. बुलढाणा में डिविजनल फॉरेस्‍ट ऑफिसर संजय एन माली धर्म और पाबंदियों को एक तरफ रखकर रमज़ान के पाक माह में प्रतिदिन रोज़ा रख रहे है.

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सबसे खास बात यह है कि वो यह रोज़ा अपने लिए नहीं बल्कि अपने बीमार मुस्लिम ड्राइवर की तरफ से रखा है. एन माली हर रोज पूरी शिद्दत के साथ रोज़ा रख रहे है और इस्लामिक नियमों के अनुसार सुबह के समय सहरी और इफ्तार के समय इफ्तारी करते हैं.

ऑफिसर एन माली ने बताया कि उन्‍होंने 6 मई को अपने ड्राइवर से रमजान के महीने में रोज़ा रखने को लेकर पूछा. तब ड्राइवर ने उन्हें बताया कि उनका मन तो बहुत ही रोज़ा रखने का लेकिन उसकी तबियत ठीक नहीं है और उसे ड्यूटी भी करनी है. ऐसे में वह पूरे दिन भूखा रहकर रोज़ा नहीं रख सकता हैं.

ड्राइवर की इसी बात को सुन कर एन माली ने कहा कि उसके नाम से अब वह खुद रोज़ा रखेंगे. इसी के बाद से ही एन माली सुबह 4 बजे उठकर रोज़े के लिए सहरी करते हैं और शाम को समय के अनुसार इफ्तार करके रोजा खोलते हैं.

ऑफिसर एन माली ने कहा कि ऐसा करने से सांप्रदायिक सद्भाव को बढावा मिलता हैं. उनका भरोसा है कि हर धर्म कुछ अच्‍छी चीजें सिखाता है. आदमी को सबसे पहले मानवता देखना चाहिए और इसी के बाद से ही धर्म. वो कहते हैं रोजा रखने के बाद से वे खुद को काफी फ्रेश महसूस कर रहे हैं.