‘हिन्दू राष्ट्र’ के फैसले को मेघालय हाईकोर्ट ने पलटा, चीफ जस्टिस मोहम्मद याकूब बोले- ये संविधान….

मेघालय हाई कोर्ट की दो जजों की बेंच ने आज एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सिंगल बेंच के एक फैसले को ख़ारिज कर दिया है. दरअसल पिछले साल सिंगल बेंच ने एक निर्देश देकर भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने का आग्रह किया था. जिस पर मेघालय हाई कोर्ट के दो जजों की खंडपीठ ने हिन्दू राष्ट्र पर दिए गए सिंगल बेंच के इस फैसले को खारिज कर दिया है.

चीफ जस्टिस मोहम्मद याकूब मीर और जस्टिस एच एस थांगखियू की खंडपीठ ने सिंगल बेंच के जस्टिस एस आर सेन के फैसले को सतही करार देते हुए कहा कि यह आदेश संवैधानिक उपबंधों के खिलाफ है.

बार एंड बेंच के अनुसार डबल बेंच ने अपने फैसले में कहा है कि इस मामले के सभी पहलुओं ​​पर विचार करने के बाद हम इस नतीजे पर पहुंचे है कि 10 दिसंबर 2018 को दिया गया निर्णय कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण है और संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है.

डबल बेंच ने कहा कि सिंगल बेंच द्वारा दिए गए फैसले में शामिल निर्देश और दिशा-निर्देश पूरी तरह से त्रुटिपूर्ण है. इसलिए इसे पूर्ण रूप से खारिज किया जाता है. आपको बता दें कि पिछले 10 दिसंबर को जस्टिस सेन ने यह विवादास्पद फैसला दिया था.

उन्होंने अपने फैसले में प्रधान मंत्री, गृह मंत्री, कानून मंत्री और सांसदों से आग्रह किया था कि वो पाकिस्तान और बांग्लादेश से आए हिंदुओं, सिखों, जैन, बौद्ध, पारसी, ईसाई, ख़ासी, जैन और अन्य समुदाय के लोगों को यहां रहने की अनुमति देने और उन्हें नागरिकता देने के लिए कानून बनाएं.

जस्टिस सेन ने निवास प्रमाण पत्र से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान दिए अपने फैसले में कहा था कि 1947 में देश का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ था इसलिए विभाजन के दौरान ही भारत को एक हिंदू देश घोषित कर दिया जाना चाहिए था.

लेकिन उस समय भारत ने धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बने रहना चुना था जबकि पाकिस्तान ने खुद को एक इस्लामिक देश घोषित किया था. कोर्ट के इस फैसले के बाद जमकर विवाद खड़ा हुआ था. जहां तक की जस्टिस सेन से स्पष्टीकरण भी मांगा गया था.

जिस पर उन्होंने कहा कि मैं धार्मिक कट्टरपंथी नहीं हूं बल्कि मैं तो सभी धर्मों का सम्मान करता हूं क्योंकि मेरे लिए भगवान एक हैं. आपको बता दें कि इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक अपील और जनहित याचिका भी दायर की गई थी जो अभी लंबित है.