भारतीय मुसलमानों द्वारा बनाई गयी ये एतिहासिक इमारतें अमर हैं, आज तक कोई देश नक़ल नहीं कर सका

दोस्तों हमारा हिन्दुस्तान: हमेशा से विशाल और अनेक धर्मों की एकता के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध रहा है. आज भी हमारे देश में, कई ऐसी इमारते और स्मारक मौजूद हैं जो के भारत के गौरवशाली इतिहास की कहानियों को बयां करते हैं. भारत हमेशा से ही अपनी ऐतिहासिक इमारतों और धरोहरों को लेकर दुनियाभर में मशहूर है. तभी तो सदियों से आज तक लाखों विदेशी, पर्यटक यात्री इन्हें देखने और भारत घूमने के लिए आते हैं.

क्या लगता है आपको, किसने बनवायीं है ये इमारतें, वो धरोहरें जिनकी गाथाएं तब तक सुनी जायेंगी जब तक धरती पर जीवन का वजूद मौजूद रहेगा. यह इमारतें कोई और नहीं बल्कि भारत देश के भारतीय मुस्लि’म Indian Muslims King, राजाओं द्वारा बनवाई गयीं थीं. वो हमेशा से चाहते थे कि इस देश में कुछ ऐसा हो जिसे सदियों तक लोग याद रखें.

भारतीय मुसलमानों द्वारा बनायीं गयी मशहूर इमारतें और स्मारक

भारतीय मुसलमानों और शासकों के द्वारा बनवाई गयी इमारतें आज भी अमर हैं. आज तक कोई देश इनकी नक़ल नहीं कर सका है. ताजमहल, लाल क़िला, चार मीनार, क़ुतुब मीनार, इमाम बाड़ा देखने के लिए पर्यटकों का सेलानियों को भारत ही आना पड़ता है. हमारे देश की गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसालें आज भी कायम हैं. जो सदियों से इस प्रथा को हम लोग निभाते आ रहे हैं.

आज इस पोस्ट के ज़रिये कुछ ऐसी इमारतों के बारे में आपको बताएँगे जिनका निर्माण मुगलों ने करवाया है. ये एतिहासिक धरोहरें, इमारतें आज भी भारत की जीडीपी बढ़ाने और देश के खज़ाने को भरने में अपना योगदान दे रही हैं. ऐसे कैसे भुला डोज तुम भला इन इमारतों को?.

ये सभी इमारतें ऐसी हैं जिनमें से कई को तो दुसरे देशों ने बनाने की कोशिश भी की, लेकिन वो सफल न हो सके. और शायद आगे भी कभी वो ऐसी इमारतों को बनाने में कामयाब न हो सकें, तो चलिए जानते हैं हमारे देश की उन अनमोल धरोहरों को जो भारतीय मुसलमानों द्वारा बनायीं गयीं हैं.

ताज महल, आगरा

दोस्तों ताज महल दुनिया की वो इमारत है, जिसको दुनिया के सात अजूबों [7 Wonder of The Word] में शामिल किया गया है. सारी दुनिया में ताज महल मोहब्बत की निशानी के नाम से जाना जाता है.

इसके पीछे ख़ास वजह ये है कि इस ताज महल को मुग़ल बादशाह, शाहजहाँ ने अपनी पत्नी मुमताज़ की याद में बनवाया था. आपको बता दें कि इस ताजमहल के अन्दर बादशाह शाहजहाँ और मुमताज़ बेगम का मकबरा है. यह ताजमहल का मुख्य आकर्षण है.

इसको देखने के लिए हजारों पर्यटक हर साल दुनिया भर के देशों से आते हैं, इससे सरकार के खज़ाने में लाखों रुपए की कमाई होती है. साथ ही आगरा में सैलानी आने की वजह से इससे जुड़े हुए हजारों लोगों को रोज़गार मिलता है.

Taj Mahal
आगरा का ताज महल

लाल क़िला, दिल्ली

इस लाल किले को प्रसिद्ध ‘किले ‘ए’ मोअल्ला’ के नाम से भी जाना जता है. यह देश की राजधानी दिल्ली में मौजूद है जो  शाहजहाँ का केंद्र बिंदु होने के साथ-साथ उस समय भी राजधानी था. लाल किले को 17 वीं सदी के दौरान बनाया गया था.

आपको बता दें कि इस किले का निर्माण उस्ताद अहमद द्वारा सन 1639 में शुरू किया गया था, जो सन 1648 तक जारी रहा. यह किला दुनिया के विशाल महलो में से एक है, जो 2.41 किलोमीटर में फैला हुआ है. वहीँ इस किले में दो मुख्य द्वार भी हैं, जिन को लाहौर गेट और दिल्ली गेट कहा जाता है. जिसे उस्ताद अहमद के शाही परिवार के लिए बनवाया गया था.

LAl Qilla
लाल क़िला

क़ुतुब मीनार, दिल्ली

दिल्ली के क़ुतुब परिसर में मौजूद यह देश की सबसे प्रसिद्ध संरचना है. इसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर के रूप में यह देश की सबसे ऊंची मीनार माना गया है.

जानकारी के लिए बता दें कि क़ुतुब मीनार की ऊंचाई 72.5 मीटर है. इसे 1193 से 1368 के बीच में क़ुतुब-अल-दीन ऐबक ने एक विजय स्तंभ के रूप में बनवाया था. जो आज भी भारत की एक देखने वाली, पर्यटन स्थल के रूप में विकसित संरचना है.

Qutub Minar
क़ुतुब मीनार

चार मीनार, हैदराबाद, तेलंगाना

यह इमारत हैदराबाद की खास पहचान मानी जाती है, जिसको मोहम्मद क़ुतुब शाही द्वारा 1591 में बनवाया था. जिस के नाम से साफ जाहिर होता है की इस इमारत में चार टावर यानि की मीनारें है. यह एतिहासिक भव्य ईमारत, प्राचीन काल की वास्तुशिल्प का बेहतरीन नमूना माना जाता है.

चार मीनार में चार चमक-धमक वाली मीनारें हैं, जो चार मेहराब से जुड़ी हुई हैं. जो मीनार को सहारा देती हैं. बता दें कि जब क़ुतुब शाही ने गोलकुंडा के स्थान को अपनी नई राजधानी बनाया था, यह उस वक़्त बनवाई गयीं थीं. वाकई यह आज भी हमारे देश के गौरव में चार चाँद लगाती है.

Char Minar
चार मीनार

बड़ा इमाम बाड़ा, लखनऊ

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में, गोमती नदी के किनारे पर बना यह बड़ा ‘इमाम बाड़ा’ नवाब आसफुद्दोला द्वारा बनवाया गया था. बता दें कि इस इमारत को बनाने मे कोई धातु या लोहे का इस्तेमाल नहीं हुआ, और न ही किसी खम्बे का इस्तेमाल किया गया.

लेकिन इसके बावजूद भी यह इमारत 50 मीटर लम्बी और 16 मीटर इसका चौड़ा हॉल है. इसे सिर्फ इंटों से बनाकर निर्माण किया गया था. आपको बता दें कि इसकी उचाई 15 मीटर है, और लगभग 20,000 टन वज़नी छत, बिना किसी बीम के सहारे मजबूती से टिकी हुई है.

इमाम बाड़ा को देखकर दुनिया के बड़े बड़े इंजीनियर भी सोचते रह जाते हैं, आखिर ये कैसे संभव हो सका है. इस इमारत को खाद्य सामग्री से मिलकर बनाया गया है, इसकी दीवारें उड़द की दाल और सफ़ेद चूने आदि के मिश्रण से तैयार की गयीं हैं.

Imam Bada
इमाम बाड़ा

जामा मस्जिद, दिल्ली

यह दुनिया की सबसे प्रसिद्ध और विशाल मस्जिदों में से एक है. यह दिल्ली में स्थित है, जिसमे एक बार में 25,000 से ज्यादा लोग समा सकते हैं.

इसको मुग़ल शासक, शाहजहाँ द्वारा 1644 में बनवाया गया था. आपको ध्यान दिला दें ये वोही शाह जहाँ हैं जिन्होंने आगरा का ताजमहल और दिल्ली के लालकिला जैसी प्रसिद्ध इमारतों का निर्माण करवाया था.

इस मस्जिद में तीन मुख्य द्वार, चार टावर और दो 40 मीटर विशाल मीनारें मौजूद हैं. जिसको लाल पत्थर और सफ़ेद संगमरमर से बनवाया गया था.

Jama Masjid
जामा मस्जिद

हुमायूँ का मकबरा, दिल्ली

यह दुनिया भर में मुग़ल शासक हुमायूँ की आखरी मंज़िल के नाम से भी जानी जाती है. क्यूंकि इसके अंदर हुमायूं का मकबरा मौजूद है.

दिल्ली में स्थित इस मकबरे को भी मुग़ल शासन काल में बनवाया गया था. बताते हैं कि मुग़ल शासकों द्वारा बनवाई गयी पहली इमारत के लिए ये मशहूर है, जिससे प्रेरित हो कर ही शाहजहाँ ने बेगम मुमताज़ के लिए ताजमहल को बनवाया था.

Humayun’s Tomb
हुमायूँ का मकबरा

ताज-उल-मस्जिद, भोपाल

यह एशिया की सबसे बड़ी मस्जिद मानी जाती है, जो मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित है, इस मस्जिद का काम मुग़ल शासक भहदुर शाह ज़फर ने अपनी बेगम के नाम पर 1844–1860 में शुरू किया था. जिसको बाद में उनकी बेटी सुलतान जहाँ बेगम ने इसको पूरा किया.

इतिहासकारों के अनुसार बताया जाता है कि, इस विशाल मस्जिद का निर्माण पैसों की कमी की वजह से रुक गया था. इसके बाद बहादुर शाह ज़फर की बेटी ने इसे बाद में पूरा करवाया था. यहाँ हर साल हजारों लोग इसकी कलाकिर्ती को देखने के लिए आते हैं.

तालाब के किनारे या मस्जिद बेहद खूबसूरत लगती है. पिछले कई वर्षों से यहां सालाना तबलीगी इज्तेमा होता था. जो अब भोपाल की आबादी ज़्यादा बढ़ जाने के कारण यहां से 12 किलोमीटर दूर, भोपाल के ही ईटखेड़ी में होता है.

इस मस्जिद से सटकर तबलीगी इज्तेमा के संपन्न होने के बाद, उसी दिन से एक विशाल मेला लगता है. जहां खासतौर से इलेक्ट्रॉनिक सामान, इस्लामिक किताबों और गर्म कपड़ों की बड़ी दुकानें लगती हैं. जहां से रोजाना हजारों लोग काफी खरीदारी करते हैं.