कोरोना: दुनिया भर में इस बार कैसे मनाया जायेगा रमज़ान, इधर मुसलमान परेशान, तो उधर यहूदियों ने..

दुनिया भर में कई धर्मो के मानने वाले है. जिनके अपने अपने घार्मिक अनुष्ठान और त्योहार होते हैं. वही सारी दुनिया में सभी धर्म के लोग त्योहार अपने अपने तरीके से मनाते हैं लेकिन इस बार काफी कुछ अलग है। आज पूरी दुनिया के 200 से भी ज्यादा देश कोरोना वायरस की म’हामा’री झेल चुके हैं. 13 लाख से भी ज्यादा लोग इस म’हामा’री से शिकार हो चुके हैं. दुनिया भर के आंकड़े बताते हैं कि 75 हजार से भी ज्यादा लोग इसकी वजह से मौ’त के मुंह में समा चुके हैं।

हलाकि यह वक्त है जब सभी मतभेदों को भुलाकर एकजुट होकर मुस्तैदी से इस बीमारी से लड़ने का है. वही लोग अपने अपने घर्मो के त्योहारो को लेकर भी चितितं हैं। ऐसे में मुसलमानों का सबसे पवित्र और बड़ा त्योहार कहे जाने वाले ‘रमजान’ भी दस्तक देने वाला है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि इस बार रमजान कैसे मनाया जाएगा?

आपको बता दें हर साल की तरह इस साल पवित्र महा रमजान में शायद ही वैसा रौनक देखने को न मिलेगी जो पिछले कई सदियों से हम देखते आ रहे है। वही दुसरी ओर यहुदी समुदाय भी बेहद चिंतित हैं क्योंकि यहूदी कैलेंडर के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक उत्सवों में से एक पासोवर की शुरुआत आठ अप्रैल की शाम से हो गई है।

वही इस मौक़े पर यहूदी परिवार और उनके क़रीबी साथ जुटते हैं और एक विशेष व्यंजन सेडर खाते हैं. धार्मिक किताबें पढ़ते हैं, गाने गाते हैं और कहानियां सुनाते हैं. यह त्योहार यहूदी समुदाय मिस्र की ग़ुलामी से आज़ादी के तौर पर मनाता है।

लेकिन इस बार कोरोना वायरस के चलते दुनिया भर में सोशल डिस्टेंसिंग को अपनाया जा रहा है, ऐसे में इस साल यहूदी समुदाय भी दूसरों को अपने साथ पारंपरिक भोजन के लिए नहीं बुला पाए और उनका यह त्योहार फीका पद गया।

बता दें ईसाइयों का ईस्टर त्योहार और मुसलमानों का सबसे पवित्र त्योहार रमज़ान भी नज़दीक ही आता जा रहा हैं इसलिए दुनिया भर में ईसाइयों और मुसलमानों को भी यही दुविधा झेलनी पड़ेंगी।

आपको बता दें मुसलमानों का पवित्र त्योहार रमज़ान 23 अप्रैल से शुरू हो रहा है. मुसलमानों के लिए यह महीना बेहद पाक होता है और कहा जाता है कि इसी पाक महीने में पहली बार पवित्र कुरान को पैग़म्बर मोहम्मद के सामने रखा गया था।

इस पूरे महीने मुसलमान रोज़ा रखते हैं और दिन में खाना-पानी से दूर रहते हैं. शाम में सूरज ढलने के बाद परिवार और दोस्तों के साथ एकजुट होकर लोग इफ़्तार करके रोज़ा खोलते हैं. वही बहुत से लोग मस्जिद जाकर भी नमाज़ पढ़ते हैं।