मैं ईसाई धर्म छोड़कर कोई भी धर्म अपना सकती थी लेकिन मैंने इस्लाम को चुना क्युकि इस्लाम की वजह से आज में ज़िंदा हूँ

इस्लाम एक ऐसा मजहब है जो अपने मानने वालों की जिंदगी के हर मोड़ पर न सिर्फ रहनुमाई करता है बल्कि वह उन्हें उन तमाम तरीकों से बखूबी रौशनास कराता है जो उन्हें पेश आने वाली मुश्किलात से छुटकारा और निजात दिलाने में अहम किरदार अदा कर सकते हैं। इस्लाम मुहासिने अखलाक का मजमूआ है और अच्छी आदतों और औसाफ पर दुनिया भर के तमाम मजहबों से ज्यादा इसने ध्यान दिया और मुसलमानों को उन्हें अख्तियार करने पर उभारा है।

यही वजह हैकि कुरआने करीम में जहां नबी करीम (सल0) की और सिफतो को बयान किया गया वहीं बहुत ही अहमियत और अजमत के साथ आप रहमतुल आलमीन और खल्के अजीम से संवरने को बयान किया है और खुद हमारे नबी (सल0) ने अपनी जबाने मुबारक से फरमाया कि मेरी बअसत उम्दा अखलाक की तकमील के लिए हुई है।

उन्हीं उम्दा अखलाक और अच्छी खसलतों में से एक बेहतरीन खसलत इफ्फत और पाक दामनी है जिसका ताल्लुक इंसान की जिस्मानी व नफ्सियाती इज्जत व आबरू से भी है और मआशी आबरूमंदी से भी। इस्लाम अपने मानने वालों को हर दो एतबार से बाइज्जत और इफ्फत के साथ देखना चाहता है।

आज इस्लाम सारि दुनिया में फैल गया लोग हर दौर में इस्लाम मजहब को कबूल करते रहे हैं और आज भी इस्लाम मजहब को लोग अपना रहे हैं आज मैं आपको एक ऐसी महिला के बारे में बताने जा रहा हूँ. जिन्होंने इस्लाम अपनाया है. और उन्होंने उसकी वजह भी बताई वह बताती हैं कि इस्लाम एक ऐसा धर्म है जिसने मुझे सुकून दिया।

21 साल की गाब्रिएला बताती हैं कि एक वक्त ऐसा आया था कि मैं खुदकुशी करने जा रही थी. इस्लाम को पढ़कर के और इस्लाम की तालीम को जान कर के खुदकशी से अपने इरादे को रोक दिया और आज मैं जिंदा हूं वह बताती है कि जब मैं ईसाई मजहब को मानती थी मैं बहुत परेशान रहती थी मुझे सुकून नहीं मिलता था लेकिन आज बहुत खुश हु।

गाब्रिएला बताती है कि जब मैं ईसाई मज़हब में थी तो बहुत छोटे कपड़े पहनती थी और ऐसे कपड़े से मेरा शरीर खुला रहता था.और लोग देख कर के उल्टे सीधे कमेंट करते थे.लेकिन अब मैं पूरे कपड़े पहनती हूँ.और अपने पूरे शरीर को ढक के रखती हूं.क्योंकि इस्लाम हमको शीलता सिखाता है ना की अश्लीलता।

वह बताती है कि जब से मैंने इस्लाम मजहब को अपनाया है उस वक्त से मैं बहुत खुश रहती हूं. वह बताती हैं कि जब मैं ने इस्लाम कबूल करने का इरादा किया तो मुझे मालूम था कि बहुत मुश्किल पेश आने वाली है.और लोग क्या क्या कहेंगे लेकिन इसके बावजूद मैंने इस्लाम धर्म को अपना लिया. वह बताती हैं मैं गर्भवती हो गई थी.और ऐसा होने की वजह से मैं बहुत परेशान थी।

मैं अपना बच्चा गिराने जा रही थी तो मुझे मेरी एक सहेली ने सलाह दिया कि तू इस्लाम धर्म को पढ़ कर देखो और इस्लाम को अपना लो क्योंकि इस्लाम धर्म अपनाने के बाद अल्लाह ताला सब गुनाहों को माफ कर देता है। वह बताती है कि मैं मान चुकी थी कि अब मैं खुदकुशी कर लूंगी लेकिन इस्लाम ने मुझे बचा लिया और मुझे एक नई जिंदगी दे दी।

Leave a comment