इमाम अब्दुल्ला हारून जिन्होंने नस्लवा’द के ख़िलाफ़ लड़ते-लड़ते अपना द’म तोड़ दिया था

द​क्षिण अफ्रीका में आज से 50 साल पहले इमाम अब्दुल्ला हारून की मौ’त लोगों के लिए और पूरी दुनिया के लिए मिसाल बन गयी थी| साल 1969 में दक्षिण अफ़्रीका के केप टाउन में 29 सितंबर के दिन दो महत्वपूर्ण घट’नाएं हुईं थी जिसमे पहली बड़ी घट’ना थी एक विशाल शवयात्रा की थी, जिसमें क़रीब 40 हज़ार लोग इमाम अब्दुल्ला हारून के श’व के साथ क़रीब 10 किलोमीटर तक चले और मोब्रे मुस्लि’म कब्रिस्ता’न में उन्हें दफ़ना’या था वहीँ दूसरी घट’ना रात को आया एक जबरदस्त भूकं’प की थी जिसने पूरी धरती को हि’ला कर रख दिया था|

बता दें कि 123 दिनों तक एकांत कारावास में रहने के बाद 27 सितंबर को इमाम हारून ने जेल में ही द’म तो’ड़ा था, इस दौरान नस्ल’भे’द के ख़िला’फ़ संघ’र्ष में उनकी संलिप्त’ता के बारे में उनसे रोज़ाना पूछताछ की जाती थी| इमाम हारून नस्ल’भे’दी शासन में हिरास’त में मर’ने वाले किसी भी धर्म के पहले मौल’वी थे|

इमाम अब्दुल्ला हारून की मौ’त की चर्चा दुनिया भर में हुई और वह पहले मुसलमा’न थे जिन्हें लंदन के सेंट पॉल कैथेड्रल में श्रद्धां’ज’लि दी गई थी| पुलिस ने उनकी मौ’त की वजह बताते हुए कहा था कि इमाम की दो टूटी हुई पसलियां और उनके शरीर पर 27 चो’टों के निशान का उनके साथ कोई लेना-देना नहीं है, उनकी मौ’त सीढ़ियों से उतरने के दौरान गि’र जाने से हुई है|

वहीँ दूसरी ओर इमाम के परिवार ने कहा कि उन्हें पुलिस का यह झूठ स्वीकार्य नहीं है और अब दोबारा 50 साल पूरा होने पर एक बार फिर से उनके मौ’त के कारणों की जांच की मांग कर रहे हैं| इसके चलते विज़ुअ’ल आर्टिस्ट हारून गुन सलैई इस अभियान का समर्थन कर रहे हैं|

आपको बता दें कि इमाम के सम्मान में ही उनका ये नाम रखा गया है और उन्होंने इमाम के जीवन और मृ’त्यु से जुड़ी घट’नाओें पर कई आर्टव’र्क बनाए गए हैं| गुन सलैई का हाल ही में किया गया काम, क्राईं’ग फॉर जस्टि’स, केप टाउन में कैसल ऑफ़ गुड होप के मैदान में लगाया गया है|

साभारः #BBCNews