Home राज्य एक सिख ड्राईवर को हाथ लगाया तो हजारों सरदारों ने इत्तेहाद किया, मुसलमा’नों आओ तुम भी मैदान में निकलो- इमाम बुखारी

एक सिख ड्राईवर को हाथ लगाया तो हजारों सरदारों ने इत्तेहाद किया, मुसलमा’नों आओ तुम भी मैदान में निकलो- इमाम बुखारी

एक सिख ड्राईवर को हाथ लगाया तो हजारों सरदारों ने इत्तेहाद किया, मुसलमा’नों आओ तुम भी मैदान में निकलो- इमाम बुखारी

देखिए अगर आप सेकुलरिज्म की बात करते हैं तो आप मुझे बता दीजिए कि कौन सी ऐसी पार्टी है जो सेकुलर है. आज अगर कोई पार्टी सेकुलर होती तो हिंदुस्तान के मुसलमा’नों की यह हालत ना होती. सेकुलरिज्म की बात तो सिर्फ मुसलमा’नों का वोट पाने के लिए एक दिखावे के लिए है. हकीकत तो यह है कि अगर इस मुल्क में कोई सेकुलर है, तो वह भारतीय मुसलमा’न है. विडियो पोस्ट के आखिर में है

देश के मुसलमा’न ने दिखा दिया की वो तुम्हारे साथ हैं, पिछले दिनों जो 2019 के लोकसभा इलेक्शन हुए, अगर हम उत्तर प्रदेश की बात करें तो उस उत्तर प्रदेश में आपने देखा होगा कि मुसलमा’न इस लोकसभा चुनाव में किसके साथ खड़ा रहा.

Imam bukhari

गठबंधन के साथ समाजवादी और बीएसपी के साथ, मुसलमा’नों ने इसको बेहतर समझा, जहाँ सपा पार्टी का कैंडिडेट था वहां सपा को वोट दिया और जहाँ बसपा का कैंडिडेट बेहतर था उन्होंने उस बेहतर उम्मीदवार कैंडिडेट को वोट दिया उसने जिस तरह बना साथ निभाया.

लेकिन अगर मैं समाजवादी पार्टी की बात करूं तो उनकी पार्टी का जो कोर वोटर है ‘यादव वोटर’ वह किधर गया? ये वोही समाजवादी पार्टी है जो दम भरती थी, कि यादव हमारा वोटर है. वह बहुत बड़ी गलतफहमी के शिकार थे. यादव वोटर ना तो सेकुलर पार्टी का रहा न गठबंधन का.

Akhilesh yadav and imam bukhari

जहाँ जहाँ सपा के मुसलमा’न उम्मीदवार थे वहां अधिकतर वोटर सपा का नहीं हुआ. वह मुसल’मानों की वजह से दूसरी पार्टी की तरफ चला गया.

और अगर आप बात करते हैं सेकुलर पार्टी बीएसपी की तो बीएसपी का भी यही हाल था उन्हें दलित, जातव वोटर के ऊपर दम था. जाटव दलितों के हाव भाव भी इस इलेक्शन में दिख गए. ठीक वैसा ही यहाँ भी हुआ जिधर मुस्लि’म कैंडिडेट दिखा वहां इन्होने वोट नहीं दिया.

उत्तर प्रदेश में चाहे समाजवादी पार्टी हो या बहुजन समाज पार्टी इनके जो कैंडिडेट जीते हैं वह सब मुसल’मानों की बदौलत ही जीते हैं, और मुस’मानों ने ही इनकी लाज रखी है. अगर मुस्लि’म वोटर इन से दूर हो जाता तो इनकी हालत बताने की जरूरत नहीं है यह सड़क पर आ जाते.

mayawati and imam bukhari

आपको देख लीजिए जहां जहां मुस्लि’म उम्मीदवार थे वहां दलितों ने यादवों ने मुस्लि’म उम्मीदवार को वोट नहीं दिया मैं फिर कहूंगा कि अगर इस देश में कोई सेक्यूलर है तो वह है सिर्फ मुसल’मान है, इस देश का मुसल’मान.

सिखों से सीखो, इत्तेहाद क्या होता है

पिछले दिनों आपने देखा कि एक सिख ड्राइवर पर पुलिस वालों ने हाथ उठाया था तो उन सारे कौम के सिखों ने अपने एक आदमी के लिए किस तरह से पूरे देश के सरदार इकट्ठे होकर इत्तेहाद करने लगे थे, और उनके आगे हुकूमत को भी झुकना पड़ा.

उस घट’ना से सम्बंधित पांच या छह जो भी पुलिसकर्मी थे उन पर कार्यवाही हुई और वे सब सस्पेंड भी हुए. इस घट’ना के बाद किसी में हिमात नहीं है की देशभर में कोई किसी सिख को हाथ भी लगा दे.

पूरे मुल्क में अगर देखा जाए तो दो या ढाई करोड़ की आबादी है सिख लोगों की. अगर देश में कहीं भी किसी सरदार पर जुल्म होता दीखता है, तो यह पूरी कौन घरों से निकल कर बहार आ जाती है.

तो कहने का मतलब यही है कि एकता में ही समझदारी है. मैं फिर कहता हूं चाहे वे मुसलमा’न हों या मुसलमा’नों के लीडर अब वक़्त है लीडरों को, सुकुलर पार्टियों को कुर्बानियां देने का. क्योंकि आप मुसल’मानों ने बहुत कुर्बानियां दे दी हैं.

अब आपको अपने घरों में से निकलना होगा. हुकूमत से सवाल करना होगा, इत्तेहाद करना होगा बिना इत्तेहाद के कुछ नहीं होने वाला. बेफिजूल की बयानबाजी भी कोई मायने नहीं रखती बयानबाजी से कुछ नहीं होगा.

यहां मुसलमा’नों के हालात किसी से छिपी नहीं हैं, अगर किसी एक भाई पर जुल्म हो रहा है तो दूसरा घर में अंदर घुसकर कुंडी लगा लेता है. बिना इत्तेहाद के कुछ नहीं होगा, मैं फिर कहता हूं कि आप मैदान में आओ और अपने हक के लिए लड़ो.

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