अपने जवान बेटे को खोने वाले मस्जिद के इमाम ने हि’न्दू-मु’सल’मान से की अपील

देश भर में चुनावों के माहौल चल रहा है, ऐसे में अक्सर ही कई रजनीतिक दल वोट की खातिर जतना के आपसी भाईचारे को खत्म कर धुर्वि’करण करने के प्रयास में रहते है. जिसके चलते सां’प्रदा’यिक त’नाव बढ़ने का ख’तरा बना रहता है. इसी खतरे को भांपते हुए एक सां’प्रदा’यिक दं’गे में बेटे को खो चुके एक इमाम ने सभी को शां’ति का पाठ पढाया है.

पश्चिम बंगाल के शहर आसनसोल में हुए एक सां’प्रदा’यिक दं’गे के दौरान मा’रे गए जवान बेटे के पिता और इमाम मस्जिद इम्दादुल्लाह रशीदी ने देश भर को शां’ति का पाठ पढ़ाया था, जो दुनियाभर के लिये मिसाल बना था. भ’ड़की हुई जन’ता को शां’त करने के लिये मस्जिद के इमाम शां’त किया था.

जुमे की नमाज से पहले दिए गए अपने बयान में मस्जिद के इमाम मौलाना इमदादुल्लाह रशीदी ने लोगों को याद दिलाते हुए कहा कि वो किसी को भी वोट देने के लिए स्व’तंत्र हैं, लेकिन हमें एकजुट रहना चाहिए और शां’ति का मौ’का देना चाहिए. 29 अप्रै’ल को चौथे चरण में आसनसोल में मतदान होने वाला है.

उन्होने कहा कि चुनाव आएंगे और जाएंगे लेकिन आने वाली पीढ़ियों के लिए हमें साथ रहना चाहिए. अपने आस-पास के प्रवचन को दूसरों के साथ अपने रिश्ते को प्रभावित न होने दें. सदियों से इस देश में हिं’दू और मुस’लमा’नों के एक साथ रहने का इतिहास रहा है.

रशीदी ने ‘रेल’पार इलाके में नूरानी मस्जिद में कहा कि यह धर्म के नाम पर एक अराजकता पैदा करने और हमारे सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करने नहीं देता है. इनता ही नहीं उन्होंने कहा कि विभिन्न राजनीतिक द’लों से संबंधित लोगों को एक दूसरे से नहीं लड़ना चाहिए हम सभी शांति से रहना जारी रखें.

बता दें कि मार्च 2018 में राम नवमी के बाद शहर में भ’ड’की हिं’सा में र’शीदी के 16 वर्षी’य बेटे मोहम्मद शि’बघुल्ला की मौ’त हो गई थी. जिसके बाद इमाम ने किसी को भी सं’दि’ग्ध के रूप में पहचानने से माना कर दिया और शांति बनाए रखने की सार्वजनिक अपील की थी. साथ ही कहा था कि अगर कोई प्रतिशोध हुआ तो वह श’हर छो’ड़ देगे. जिसके बाद शहर में शां’ति हो गई थी.