मध्य प्रदेश में दो दिन तक चली माथापच्ची के बाद आखिरकार खिला कमल, सिंधिया को बड़ा झटका

मध्य प्रदेश में भाजपा को हराकर सरकार बनाने जा रही कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पद के लिए कमलनाथ का नाम लगभग तय कर लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कमलनाथ का नाम खुद सिंधिया ने प्रपोज किया यानी आगे रखा।इसके साथ ही तमाम उन अटकलों को खारिज कर दिया गया कि मध्यप्रदेश में कमलनाथ और सिंधिया के बीच गुटबाजी हो रही है।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आखिरकार कमलनाथ के नाम पर मोहर लगा दी है. इसके साथ ही कांग्रेस के फायरब्रांड नेता माने जाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया को बड़ा झटका लगा है. राहुल गांधी की मंजूरी मिलते ही जयपुर में शाम 6 बजे पार्टी विधायकों की मीटिंग में कमलनाथ का नाम सार्वजनिक किया जाएगा।

विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के साथ ही मुख्यमंत्री पद के लिए गुना से सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया और छिंदवाड़ा से सांसद कमलनाथ के नाम की चर्चा चल पड़ी थी. रिजल्ट के बाद से ही दोनों नेताओं के समर्थक अपने-अपने नेता को सीएम बनाने के लिए लॉबिंग करने में जुट गए थे।

मुख्यमंत्री पद को लेकर दोनों ही नेताओं के समर्थकों ने राज्य में काफी नारेबाजी भी की थी. कहीं-कहीं तो समर्थकों में झड़प की भी खबर सामने आई थी. लेकिन आखिरकार कांग्रेस अध्यक्ष ने अनुभव और सीनियरिटी को तवज्जो देते हुए कमलनाथ को सत्ता चाभी सौंप दी. इसके साथ ही कमलनाथ मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बनने की रेस में जीत गए।

बता दें कि कमलनाथ मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष हैं. पिछले काफी महीनों से वह राज्य में कांग्रेस की जीत के लिए भूमि तैयार कर रहे थे. यह तो सभी जानते हैं कि राज्य में 15 साल बाद कांग्रेस का वनवास कमलनाथ की अगुवाई में ही खत्म हो पाया है।

कमलनाथ को एक समृद्ध राजनेता के तौर पर देखा जाता है उनका जन्म कानपुर में हुआ और वह कोलकाता में पले-बढ़े हैं. उनकी पढ़ाई दून स्कूल से हुई है. कोलकाता के सेंट जेवियर्स कॉलेज से उन्होंने स्नातक किया है. साल 1980 में वह पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए थे. उसके बाद 1985, 1989, 1991 तक लगातार लोकसभा चुनाव जीतते रहे।