अयोध्या मामला: अब हिंदू महासभा ने मस्जिद के लिए पांच एकड़ ज़मीन देने के निर्देश के खिलाफ....

अयोध्या मामला: अब हिंदू महासभा ने मस्जिद के लिए पांच एकड़ ज़मीन देने के निर्देश के खिलाफ….

नई दिल्ली: राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद के बाद अब हिंदू पक्ष ने भी सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की है। सोमवार को उच्चतम न्यायालय का रुख करते हुए हिंदू महासभा ने अपनी याचिका में कोर्ट से मुस्लि’म पक्ष को मस्जिद निर्माण के लिए पांच एकड़ जमीन देने के अपने आदेश पर फिर से विचार करने की अपील की है।

आपको बता दें शीर्ष न्यायालय ने बीते नौ नवंबर के फैसले ने दशकों से चले आ रहे इस विवाद को खत्म करते हुए अयोध्या में विवा’दितभूमि को हिन्दू पक्ष को राम मंदिर के निर्माण के लिए देने के आदेश के साथ ही मुस्लि’म पक्ष को अयोध्या में 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया था। अदालत में विवादित जमीन पर मुस्लिम पक्ष का दावा खारिज कर दिया था।

अयोध्या मामले पर मस्जिद के लिए जमीन देने के विरोध में हिंदू महासभा ने दायर की पुनर्विचार याचिका

बता दें महासभा के अलावा मानवाधिकार कार्यकर्ताओं सहित 40 लोगों ने संयुक्त रूप से शीर्ष न्यायालय का रुख कर अयोध्या मामले में उसके फैसले पर पुनर्विचार का अनुरोध किया है। इन लोगों में इतिहासकार इरफान हबीब, अर्थशास्त्री एवं राजनीतिक विश्लेषक प्रभात पटनायक, मानवाधिकार कार्यकर्ता हर्ष मंदर, नंदिनी सुंदर और जॉन दयाल शामिल हैं।

हिंदू महासभा ने वकील विष्णु शंकर जैन और हरिशंकर जैन के जरिये अपनी याचिका दाखिल की गई है। इसमें पांच सदस्यीय संविधान पीठ के नौ नवंबर के फैसले में लिखी उस टिप्पणी को भी हटाने का अनुरोध किया है जिसमें कोर्ट ने यह कहते हुए मुस्लि’म पक्ष को पांच एकड़ जमीन देने का निर्देश दिया कि वहां पर मस्जिद थी।

जबकि उपलब्ध साक्ष्यों व प्रमाणों के आधार पर कोर्ट ने ही कहा है कि मुस्लि’म पक्ष वहां पर मस्जिद होने का सुबूत पेश करने में नाकाम रहा। बता दें याचिका में कहा गया कि जब ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि अयोध्या के विवा’दित स्थल पर मस्जिद थी तो फैसले के उस हिस्से से ‘मस्जिद’ शब्द को हटाया जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि जब मुस्लि’म पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा है कि विवा’दित ढांचा मस्जिद थी।

ऐसे में मुस्लि’म पक्ष को मस्जिद बनाने के लिए वैकल्पिक जगह देना धर्मनिरपेक्षता के खिला’फ है और यह सांविधानिक सिद्धांतों के खिला’फ है। राज्य को मस्जिद बनाने के लिए जमीन देने का निर्देश नहीं दिया जा सकता। वही महासभा ने अपनी याचिका में यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट को अपनी उस टिप्पणी को स्पष्ट करना चाहिए,

जिसमें उसने कहा था कि उसके फैसले का असर बाबरी वि’ध्वंस मामले की चल रही सुनवाई पर नहीं पड़ना चाहिए। नौ नवंबर को अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या की विवा’दित जमीन रामलला विराजमान को सौंप दी थी। जबकि मुस्लि’म पक्ष को अयोध्या में ही किसी अन्य जगह मस्जिद बनाने के लिए पांच एकड़ जमीन देने का निर्देश दिया गया था।

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