देशभर में मंदी के हालात को देखते हुए पीएम मोदी ने बुलाई बैठक, निर्मला सीतारमण से मिलकर की हालातो पर चर्चा

देश भर में लगातार मंदी की मार से जूझ रही ऑटो इंडस्ट्री से लेकर तमाम सैक्टरों की मुसीब’तें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। कुछ समय पहले यह ख़बर आई थी कि ऑटो सेक्टर से 10 लाख नौकरियाँ जाने का ख़त’रा है तो वही अब ख़बर आई है कि पिछले 18 महीनों में 286 डीलरों को अपनी दुकानें बंद करनी पड़ी हैं। इसके अलावा जुलाई, 2019 में पिछले 19 सालों में सबसे कम वाहनों की बिक्री हुई है। ऑटो इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि अभी इससे भी ज़्यादा ख़राब हाला’त आने वाले हैं।

उपभोक्ता की मांग और निवेश में कमी के साथ ही देश में मंदी का संकट नज़र आ रहा है। इस मामले में जानकारों का कहना है की इस मंदी के चलते भविष्य में कई मेनुफेक्चरिंग कंपनियों के बंन्द होने की संभावना है आपको बता दें कि जून 2019 में सरकार के पास आने वाले टैक्स की पूँजी में करीब 30 % की कमी आयी है वहीँ दूसरी तरफ इंडिया इंक द्वारा किये गए नए प्रोजेक्ट के एलान पर भी थोड़ा थोड़ा असर दिखाई दे रहा है।

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Image Source: Google

वही ऑटो सैक्टर में निवेश में आयी मंदी को देखते हुए गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और कई शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक की जिसमे देश की अर्थ विवस्था और निवेश में आयी गिरावट के बारे में चर्चा की गयी चर्चा में इस संकट से बचने और उनका सामना करने के उपाए पर भी बात की गयी।

ऑटो सैक्टर के जानकारों के मुताबिक निवेश में आयी कमी फ़िलहाल अभी लम्बी चलेगी और यह सारे हालात देखते हुए आज देश की कई सारी मैनुफक्चरिंग कम्पनियां अपने भविष्य के लिए निराशा वादी बने हुए है अप्रैल-जून 2019 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने एक इंडस्ट्रियल आउटलुक सर्वे किया था जिसमें 1231 की मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियां शामिल हुई थी।

वही एक सर्वे में पता चला कि देश की सिर्फ 31.6 प्रतिशत मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियां ही अपने ऑर्डर में वृद्धि की उम्मीद कर रहीं थी जो कि पिछले दशक में सबसे कम हैं देश की अर्थव्यवस्था का आलम यह कि अब कोई नए प्रोजेक्ट ही नहीं आ रहे हैं स्टेटिक एंड प्रोग्राम इंप्लीमेंटेशन मंत्रालय के अनुसार, देश में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप से चल रहे 65 प्रोजेक्ट में से 1 मई 2019 तक 37 प्रोजेक्ट देरी से चल रहे हैं जो की अब तक पूरे नहीं हो पाए हैं।

आपको बता दें नए प्रोजेक्ट की घोषणाओं में भारी कमी आयी है जून 2019 की तिमाही नए प्रोजेक्ट के लिहाज से सबसे खराब तिमाही में से एक रही है CMIE का कहना है की साल 2018-19 में जहां 2.7 लाख करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट का ऐलान हुआ, वहीं जून 2019 की तिमाही में यह घटकर सिर्फ 71,000 करोड़ पर आ गया है। जो क्षमता बढ़ाने वाले प्रोजेक्ट साल 2014-15 में 21 लाख करोड़ रुपए के थे, वहीं साल 2018-19 में यह घटकर 10.7 लाख करोड़ रह गए हैं|

जो फ्रैक्ट्री आउटपुट ग्रोथ बीते वित्तीय वर्ष के 7 प्रतिशत के मुकाबले कम है वह अब 4 माह में घटकर 2 प्रतिशत रह गई है, इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन के आंकड़ों के अनुसार यह पता चला है कि देश में मैन्यूफैक्चरिंग और माइनिंग सेक्टर में काफी गिरावट आयी है और बीते साल जहां इन सेक्टर्स की ग्रोथ 5.1 प्रतिशत थी, वहीं इस साल यह घटकर 3.6 प्रतिशत हो गई है।

वही इन सब के साथ-साथ हवाई ट्रांसपोर्ट में भी गिरावट देखने को मिल रही है। साल 2019-20 में देश में कुल हवाई ट्रांसपोर्ट, जिसमें डोमेस्टिक और इंटरनेशनल दोनों शामिल हैं, उसमें 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आयी है इसी तरह समुद्र के रास्ते होने वाले व्यापार में भी कमी देखी जा रही है।

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