बड़ी खबर: 27 हज़ार जवानों की छट’नी करने की तैयारी में है भारतीय सेना, लिया बड़ा फैसला, देखिये

नई दिल्लीः अभी हाल ही में आयी रिपोर्ट के अनुसार यह पता चला है, भारतीय सेना का 80 प्रतिशत से ज्यादा का राजस्व सैलरी देने और दिन प्रतिदिन के खर्चे पूरे करने में ही सरकार का पूरा पैसा इस्तेमाल हो जाता है और सेना के आधुनिकीकरण के लिए सरकार के पास काफी कम बजट बचता है। जिसके चलते इंडियन आर्मी ने एक बड़ा फैसला लिया है जिसमे लगभग 27000 से भी ज्यादा सैनिकों को छाँट कर हटाया जायेगा।

रिपोर्ट के अनुसार इंडियन आर्मी अपने 27000 सैनिकों की छंटनी करने पर विचार कर रही है। जिन सैनिकों की छंटनी की जा सकती है वह आर्मी की रेगुलर फील्ड फॉर्मेशन और यूनिट का हिस्सा नहीं है वह सिर्फ संगठन के स्तर पर काम करते हैं। द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार इस बात का खुलासा किया है। जिससे इस छंटनी से सेना को करीब 1600 करोड़ रुपए तक की बचत होगी।

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बता दें की आर्मी में इस वक्त लगभग साढ़े 12 लाख सैनिक और अधिकारी कार्यरत के पदों पर नियुक्त हैं। अब यह कोशिश की जा रही है कि सेना को मजबूत मारक और प्रभावशाली बनाने के लिए इसके साइज में कुछ कटौती की जाए ताकि सेना के बजट का ज्यादा से ज्यादा हिस्सा उसे आधुनिक बनाने पर खर्च किया जा सके।

इस रिपोर्ट के अनुसार अभी सेना का 80 प्रतिशत से ज्यादा का बजट सैलरी देने और दिन-प्रतिदिन के खर्चे पूरे करने में ही इस्तेमाल हो जाता है और सरकार के पास सेना के आधुनिकीकरण के लिए काफी कम बजट बचता है जो सेना के आधुनिकरण के लिए बिलकुल ना के बराबर है।

बता दें कि सेना की संगठन यूनिटों जैसे मिलिट्री इंजीनियर सर्विस नेशनल कैडेट कोर्प्स बोर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन टेरीटोरियल आर्मी और सैनिक स्कूल के साथ ही साथ सेना के ऑपरेशन के लिहाज से महत्वपूर्ण असम राइफल्स राष्ट्रीय राइफल्स और स्ट्रैटेजि’क फोर्से’स कमांड में करीब 1 लाख 75 हज़ार सैनिक काम करते हैं। ये सैनिक सेना की सामान्य स्टैंडिंग आर्मी का हिस्सा नहीं है बल्कि अन्य नॉन कोर एक्टिविटीज से जुड़े हैं। सेना इन्हीं यूनिटों से फिलहाल 27 हज़ार सैनिकों की छंटनी करने पर विचार कर रही है।

फिलहाल तो सेना ने इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए रक्षा मंत्रालय के पास भेजा है। टीओआई की इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सेना आने वाले 6 से 7 सालों में अपने कार्यबल में 1.5 लाख सैनिकों की छंटनी करने की योजना बना रही है। बताया जा रहा है कि इससे सेना को हर साल 6000 से 7000 करोड़ रुपए तक की बचत होगी जो सेना के आधुनिकरण में इस्तेमाल की जाएगी।