बुलंदशहर हिं’सा: इंस्पेक्टर सुबोध सिंह के ह’त्या के आरोपी की लगाई मूर्ति, एक नौकरी और 50 लाख की आर्थिक मदद का आश्वासन

कई बार हमारे आसपास ऐसी घट’नाएं हो जाती हैं, जो लोगों के दिलो दिमाग को विचलि’त कर देती हैं. कई बार तो यकीन करना इतना मुश्किल हो जाता है, कि क्या वाकई में ऐसा हुआ है. आज हम बात कर रहे हैं, बुलंदशहर की हिं’सा की जिसमें एक ईमानदार इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह ने अपनी जा’न की बाजी लगाकर एक बड़ी हिंस’क घट’ना को होने से रोक दिया था.

हालांकि उनकी जान तो चली गई, लेकिन आज यह सब जो हो रहा है उसको देखकर इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की आ’त्मा रो देती होगी. उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में कथित रूप से जो गोक’शी को लेकर एक हिं’सा हुई थी और उसी हिं’सा को रोकने के चलते इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की जा’न गई थी.

Inspector Subodh Kumar Singh ka hatya ka aropi

उसी दौरान एक युवक भी मा’रा गया था जिसका नाम सुमित था. इसी के परिजनों ने उसकी मूर्ति का निर्माण कराया है. उसके पिता अमरजीत सिंह बताते हैं, कि वह इस मामले को लेकर कई बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिल चुके हैं. वे अपने बेटे का बेगुनाह होने का दावा भी करते हैं, लेकिन इसके बावजूद भी सरकार ने उनके बेटे को शही’द का दर्जा नहीं दिया.

तब इसके बाद उन्होंने खुद ही उसकी मूर्ति की स्थापना कराई, और उसे ‘गौ रक्ष’क शही’द’ का दर्जा दिया. सुमित के घर वालों ने उनके गांव में ही उसकी मूर्ति लगाई है, और उस पर लिखा है ‘गौ रक्षक वीर शही’द चौ. सुमित दलाल धाम.

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार सुमित के परिजनों ने सीबीआई जांच कराने की मांग की है, और सुमित के पिता अमरजीत ने कहा है कि अगर ऐसा नहीं होता है तो वह हिंदू धर्म छोड़ देंगे, और उत्तर प्रदेश की सरकार अगर हमारी मांगों को पूरा नहीं करेगी तो ना केवल वे धर्म परिवर्तन करेंगे वल्की आगामी 3 दिसंबर को आ’त्मह’त्या करने की भी धम’की दी है.

आपको बता दें कि 3 दिसंबर 2018 को बुलंदशहर जिले के म्याना कोतवाली के अंतर्गत आने वाले एरिया में हिं’सा हुई थी. उस दौरान म्याना थाने में ही इस्पेक्टर सुबोध कुमार प्रभारी के रूप में तैनात थे, वहीँ उस हिं’सा में 20 वर्षीय सुमित की गो’ली लगने की वजह से मौ’त हो गई थी.

इस हिं’सा में पुलिस ने सुमित को भी आरो’पी बनाया था. सुमित के परिजनों का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक सरकारी नौकरी और 50 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने का आश्वास’न भी दिया था. मगर अब परिजन प्रशासन के ढीले रवैए से परेशान हैं.

एक बात और याद दिला दें कि इसी बुलंदशहर हिं’सा का एक अन्य आरोपी भी कुछ महीनों पहले ज़मानत पर रिहा हुआ था, तब उसकी रिहाई पर लोगों ने फूल मालाओं से उसका गर्मजोशी से स्वागत किया था. बुलंदशहर हिं’सा का मुख्य आरोपी बजरंग दल का नेता योगेश राज है, और वह इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की ह’त्या का भी आरोपी है.

पोस्ट सोर्स: द वायर