बड़ी-बड़ी प्रतिमाएं लगाने के बजाय देशभर में अच्छे स्कूल और यूनिवर्सिटी खोले जाएँ- पूर्व गवर्नर रघुराम राजन

देश में पिछली तिमाही में भी जीडीपीडी की कम ग्रोथ होने के बाद, इकोनामिक बढ़ने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं. हालांकि लगातार पिछली छह तिमाही से, भारत की जीडीपी लगातार निचले स्तर पर ही जा रही है. और भविष्य में इसको लेकर भी कोई बेहतर संभावना नजर नहीं आ रही. अधिकतर कारोबार सुस्ती के चलते अपने लक्ष्य से भटक गए हैं. देश में बेरोज़गारी का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है.

भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर ‘रघुराम राजन’ ने, नोटबंदी से पहले ही मोदी सरकार को इस बारे में आगाह कर दिया था. अगर नोटबंदी की तो, भारत के आर्थिक क्षेत्र में यह अच्छा फैसला नहीं होगा. इसके बाद जब मोदी सरकार ने रघुराम राजन की बात को नज़रंदाज़ करते हुए नोटबंदी की.

पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने आर्थिक मंदी पर चिंता जताई

Raghuram Rajan Former Governer
भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर ‘रघुराम राजन’

जैसे तैसे भारत की जनता और व्यापारी इसको झेल गए, लेकिन इन्होने इसके बाद जीएसटी कर लगाया, इसके बाद तो मानो व्यापारियों और उद्योगपतियों का दिवाला निकल गया. जिसका नतीजा यह हुआ कि देशभर में कई बड़ी शक्तिशाली उत्पादन के क्षेत्र में दिग्गज माने वाली कंपनियां, या तो बंद हो चुकी हैं या कई बंद होने की कगार पर हैं.

इसके अलावा जो हजारों लोगों के रोजगार पर संकट आया, और लाखों लोगों की नौकरियां चली गएँ. यहां तक कि कई को तो अपनी जान से तक हाथ धोना पड़ा. ऑटोमोबाइल सेक्टर के बाद अब टेलीकॉम सेक्टर के पांव भी डगमगाने लगे हैं.

भविष्य में कुछ और बची खुची कंपनियों का दिवाला कब निकल जाए, कोई भरोसा नहीं है. देश की भरोसेमंद कंपनी बीएसएनएल. एमटीएनएल. भारत पैट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड. स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया. बीएचईएल यह सब नोटबंदी और जीएसटी की मार के चलते, निजीकरण को मोहताज हैं.

भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर, रघुराम राजन ने कहा है कि देश की स्थिति संभालने के लिए सरकार को देशभर में महापुरषों की बड़ी-बड़ी प्रतिमा न लगाक,र देशभर में मोर्डन स्कूल और यूनिवर्सिटी खोलनी चाहिए. जिससे बच्चों के दिमाग का विकास अच्छी तरह से हो सकेगा.

अच्छी शिक्षा की बदौलत वह अपनी मोर्डन सोच को एक नया मकान दे पाएंगे. जिससे देश तरक्की करेगा. इसके अलावा उन्होंने हिंदू राष्ट्रवाद पर भी कहा, अगर हिंदू राष्ट्रवाद जैसी भावना लोगों में घर करेगी, तो इससे सिर्फ सामाजिक तना’व बढ़ेगा, बल्कि यह भारत को भी अपने विकास के रास्ते से भटकाएगा.

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बेहतर है कि बच्चों को अच्छी शिक्षा दी जाए, जिससे वह दूसरों के प्रति दयावान बनें. पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने यह बात इंडिया टुडे के अपने एक लेख में कही थी कि जो सत्ता में होते हैं उनमें एक आदत पाई जाती है, वह और ज्यादा नियंत्रण करना चाहते हैं. और मौजूदा सरकार भी वही कर रही है.

उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था, इस समय सुस्ती के चुंगल में फंसी हुई है. वहीं सरकार के सभी मंत्री अधिकार विहीन हैं. बेहतर हो कि अगर सभी पावर प्रधानमंत्री कार्यालय के अधीन न होकर मंत्रियों को भी कुछ पावर दिए जाएं तो वह भी देश हित में बेहतर निर्णय ले सकते हैं.