औरत खुदा का दिया हुआ एक नायाब तोहफा है, इस्लाम के ऐतबार से उसका दर्जा

इस्लाम में औरतों के अधिकार को लेकर बहुत अधिकार दिए हैं| हालांकि अधिकतर लोगों में इस बात को लेकर काफी बहस गरमा गरम होती है कि इस्लाम में औरतों को सिर्फ चूल्हे चौके तक सीमित रखा जाता है| जबकि यह बात पूरी तरह से गलत है इस्लाम ने जो अधिकार औरतों को दिए हैं हे दुनिया के किसी भी दूसरे मजहब ने नहीं दिए और इस बात में कोई दो राय नहीं की औरत खुदा का दिया हुआ एक नायाब तोहफा है इसलिए इसकी इज्जत करना चाहिए|

अगर एक प्रेग्नेंट औरत दो रकात नमाज पढ़ती है तो उस औरत की नमाज़ को आम औरत की नमाज़ से 70 गुना ज्यादा सबाब मिलेगा| यानी कि उसको 2 रकात नमाज पढ़ने के बदले 70 रकात नमाज पढ़ने से बढ़कर सवाब मिलेगा|

इस्लाम में महिलाओं का मर्दों से बढकर रुतबा

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जिसका शोहर परेशान घर आता है, और ऐसे में बीवी उसे तसल्ली देती है तो उस औरत को ज्यादा सवाब मिलता है| और ऐसा होना भी चाहिए अक्सर कई घरों में देखा जाता है कि जब मर्द अपने काम से वापस आता है, कुछ महिलाएं उनके आते ही अपनी रोजमर्रा जिंदगी की परेशानियों का बखान करने बैठ जाती हैं|

लिहाजा ये सब नहीं होने चाहिए| इस बात का ध्यान रखा जाए कि वो जब घर में आये तो उसका हाल-चाल पूछें उसको तसल्ली दें|

ऐसी औरत जो अपने बच्चे के रोने की वजह से रात भर सो ना सकी हो, तो उसे अपने बच्चे की खिदमत करने के बदले 70 गुलाम आजाद करने जितना सवाब मिलता है| और अगर शौहर बीवी एक दूसरे को मोहब्बत की नजर से देखते हैं तो अल्लाह पाक उनको अपनी रहमत की निगाहों से देखता है|

उनके घर में रोजी-रोटी में बरकत होती है| इसलिए जितना हो सके घर के अंदर चिल्ला चोंट ना होने दें| यानी की छोटी मोटी बातों पर झगड़ा न करें|

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और जो ओरत अपने खाबिन्द (पति) को अल्लाह के रास्ते में (जमात) या नमाज़ के लिए भेजती है, तो वह उस औरत के लिए इस्लाम में कहा गया है कि वह अपने शौहर से 500 साल पहले जन्नत में जायेगी|

घर में खाना बनाने के वक्त जब मुस्लिम महिला आटा गूंधती है और उसी दौरान वो अगर बिस्मिल्लाह पड़ती है, तो अल्लाह पाक उसी वक्त उसके रिज्क में बरकत डाल देते हैं|

जो महिलाएं गैर मर्दों की तरफ निगाह उठा कर देखती हैं, तो अल्लाह उन पर लानत भेजता है| और जो औरत अपने शौहर के बिना कहे रात को सोने से पहले उसके पैर दबाती है तो उसे 70 तोला सोना सदका (दान) करने का सवाब मिलता है|

एक ओरत को एक बच्चा पैदा करने पर 75 साल की नमाज का सवाब मिलता है| और उस दौरान उसको हर एक दर्द पर 1 हज का सवाब मिलता है| महीन और बारीक लिबास पहनने वाली और गैर मर्द से मिलने वाली औरत कभी जन्नत मेँ दाखिल नहीँ होंगी|