भक्तो को खुश करने के चक्कर में जी न्यूज़ के रिपोर्टर ने इस्लाम के खिलाफ दिया बेतुका बयान

जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए चरमपंथी हमले के बाद मीडिया का एक बड़ा धड़ा इस्लाम को बदनाम करने में लगा हुआ है. इस हमले के बाद मानों गोदी मीडिया को खुली छुट और मौका मिल गया है. हमले के बाद से ही एक विशेष पार्टी का समर्थक गोदी-मीडिया बिना किसी आधार के मुस्लिमों को और इस्लाम को बदनाम करने की कोशिशों में लगा हुए है. इसी के तहत मीडिया का यह धड़ा अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय के धार्मिक स्थलों को भी बदनाम करने की कोशिशों में लगा हुए है और उन्हें हिन्दू धर्म से जोड़कर निशाना बनाया जा रहा है.

इसी बीच देश के एक जाने माने और मशहूर न्यूज़ चैनल ने सऊदी अरब में स्थित इस्लाम धर्म के सबसे पवित्र स्थल मक्का पर आपत्तिजनक टिप्पणी की है. जिसके बाद से ही चैनल विवादों में घिर गया है और चैनल की जमकर आलोचना हो रही है.

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अक्सर ही देश के कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा मुसलामानों और इस्लाम को अपना निशाना बनाया जाता रहा है. खुद को हिन्दू धर्म का ठेकेदार मनाने वाले कुछ लोग हमेशा ही कहते रहते है कि मक्का में बनी मस्जिद शिव मंदिर है. मक्का में शिव मंदिर बताकर मुस्लिमों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कुछ संगठन करते रहे है.

लेकिन अब इसमें मीडिया भी शामिल हो गया है. हाल ही में हिंदू महासभा ने एक बयान में ताजमहल को तेजो महालय, मक्का को मक्केश्वर महादेव, कुतुबमीनार को विष्णु स्तंभ बताया था. जिसके बाद अब यह दावे मीडिया चैनल और वरिष्ठ पत्रकार भी करके साम्प्रदायिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कार्य कर रहे है.

हिंदी न्यूज़ चैनल जी न्यूज़ के वरिष्ठ पत्रकार ब्रजेश कुमार सिंह ने नेशनल टेलीविज़न पर दावा करते हुए कहा कि काबा एक शिव मंदिर था और जिस पत्थर को मुस्लिम लोग चूमते है वो शिव मंदिर का पत्थर है. इतना ही नहीं उन्होंने इसे लेकर ट्विट्टर पर ट्वीट किया और लोगों से भी पूछा कि क्या मक्का में एक समय शिवमंदिर था?

पत्रकार ने अपने एक और ट्वीट में कहा कि कभी मंदिर का हिस्सा रहे क़ाबा के काले पत्थर को हज यात्रा के समय मक्का आने वाले दुनिया भर के करोड़ों मुसलमान क्यों चुंबन देते हैं. इसके बारे में भी लिखा है महापंडित राहुल सांस्कृत्यायन ने.

इसके आलावा जी न्यूज़ के पत्रकार ने अपने एक और ट्वीट में अटाला मस्जिद का ज़िक्र किया और उसे लेकर कहा कि अटाला मस्जिद अटाला देवी के मंदिर की जगह पर बनाया गया था. इसके निर्माण में मंदिर की ही ज़्यादातर सामग्री का इस्तेमाल करके बनाया गया था.

इस बड़ी मस्जिद का निर्माण जौनपुर के तत्कालीन शासक इब्राहिम शाह शर्की ने 1408 ईस्वी में कराया था जो फ़िलहाल अटाला मस्जिद के तौर पर जानी जाती है. मशहूर इतिहासकार आर सी मजूमदार ने भी इसका ज़िक्र किया है. पत्रकार के इन ट्वीट के बाद लोगों में भारी गुस्सा देखने को मिला.