आइये जानते है इस्लाम में सबसे मज़बूत अमल कौन सा है इसके बारे में !

हमारे प्यारे नबी मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक बार सहाबियों से फ़रमाया की क्या तुम जानते हो इस्लाम में सबसे मज़बूत अमल कौन सा है, तो सहाबियों ने अलग अलग अमल बताया जैसा की किसी ने कहा की नमाज़ पढ़ना है आपने फ़रमाया की नमाज़ बहुत अच्छा अम्ल है पर सबसे मज़बूत नहीं।

किसी ने कहा की रोज़ा रखना आपने फ़रमाया की रोज़ा रखना बहुत अच्छा अम्ल है पर सबसे मज़बूत नहीं ,किसी ने कहा हज करना आपने फ़रमाया की हज करना बहुत अच्छा अम्ल है पर सबसे मज़बूत नहीं, किसी ने कहा जिहाद करना आपने फ़रमाया की जिहाद करना बहुत अच्छा अम्ल है पर सबसे मज़बूत नहीं।

अब सुनो की इस्लाम का सबसे मज़बूत अम्ल कौन सा है ,आपने फ़रमाया की इस्लाम में सबसे मज़बूत अम्ल आपस में अल्लाह के लिए मोहब्बत करना है और अल्लाह के लिए बुग़ज़ रखना है, बुग़ज़ रखने से मतलब है की बुरे से नफरत ना हो बुराई से नफरत हो।

खैबर की जंग हज़रत अली और यहूदियों के बीच टकराव ,हज़रत अली ने यहूदी को गिराया क़त्ल करने के लिए तलवार उठायी यहूदी ने मुँह पर थूक दिया आप पीछे हट गए उठ गए आओ दोबारा आओ, अरे मैंने तो गुस्से में मुँह पर थूक दिया ताकि जल्दी क़त्ल करो और तुम मुझे क्यों छोड़ कर पीछे हट गए।

सुनो तेरा मेरा कोई ज़ाती झगड़ा नहीं मैं अल्लाह के लिए तुम्हे क़त्ल कर रहा था, अल्लाह के लिए तुम्हारे साथ लड़ रहा था जब तुमने मेरे मुँह पर थूका तो मुझे गुस्सा आ गया तो कंही यह तलवार मेरी गुस्से की वजह से ना चल जाती इसलिए मैं पीछे हट गया आओ दोबारा लड़ेंगे अब यहूदी ने कहा की मुझे कलमा पढ़ा मैं नहीं लड़ता।

इसलिए आपस की नफरत को मिटाओ ,एक दुसरे को माफ़ करना सीखो।