पैगंबर मुहम्मद की इस बात से मेरे दिल में इस्लाम के प्रति मोहब्बत बढ़ना शुरू हुई: अंजलि शर्मा

दुनिया भर में जितना ज़्यादा इस्लाम का दुष्प्रचार किया ये उतनी तेज़ी से फैलता चला गया लोगों ने सोचा इस्लाम को वक़्त रहते ख़त्म कर दिया जाये मगर इसका असर उसके विपरीत हुआ उस ज़माने में जिस जगह इस्लाम को ज्यादा बदनाम किया गया इस जगह इस्लाम उतनी ही तेजी से फैला जब उस समय लोगो द्वारा इस्लाम को और मोहम्मद साहब को झूठा कहा गया जब लोगों को इस्लाम को करीब से जानने की उत्सुकता बढ़ती चली गई जिसके बाद जो इस्लाम को करीब से जान लेता था तो वह इस्लाम कुबूल कर लेता था।

क्योकि सोशल मिडिया पर सबसे ज्यादा इस्लाम का दुष्प्रचार

क्योकि बात थी सत्य और असत्य की क्योकि इस्लाम शांति और अमन का मजहब है इस्लाम एक ऐसा मजहब धर्म है जिसमे मर्द, औरत, बच्चा, बूढा, जवान, दोस्त, रिश्तेदार, सभी को इस्लाम ने हक़ दिया गया है इस्लाम अपने आप ने संपुर्ण है. आज जिस तरह इस्लाम को बदनाम करने के लिए कुछ लोगों द्वारा भरपूर कोशिश की जा रही है इस्लाम को बदनाम करने के लिए सभी साधनों का उपयोग किया जा रहा है जिसके फलस्वरूप आज अपनी तेजी से इस्लाम फ़ैल रहा है, क्योकि सोशल मिडिया पर सबसे ज्यादा इस्लाम का दुष्प्रचार देखने में आया है

दूसरों को मज़हब के मामले में तंबीह करने, झिड़कने, डंपटने से आप दूसरों के दिल में बग़ावत और बेज़ारी ही पैदा करते हैं न कि मज़हब पर अमल का शौक़…. मज़हब पर अमल का शौक़ तो दूसरों के दिलों में तब पैदा होता है, जब आप ख़ुद मज़हब पर अमल करते हुए ऐसे अच्छे अच्छे काम करते हों कि ज़माना आपको एहतराम, इज़्ज़त और तारीफ़ की नज़र से देखने लगे…. फिर आपको देखने वाला हर इंसान खुद चाहेगा कि वो भी आपकी तरह मज़हबी हो जाए|

इस्लाम से खासा प्रभावित हुईं अंजली

बरसों पहले अपने बड़ों से मैंने ये ख़ूबसूरत सीख हासिल की थी, कि उन्होंने कभी हमें मज़हब के नाम पर डांटा डपटा नही बल्कि उन लोगों का तरीका ये था कि जब कोई अच्छा काम करते तो उस काम की मज़हबी बुनियाद के बारे में भी बताया करते थे चाहे वो किसी भी मज़हब की हो|

इस्लाम का मतलब है कि आपकी वजह से किसी दुसरे को तकलीफ नहीं होनी चाहिए भले ही वो कोई जानवर या कीड़ा मकोड़ा ही क्यों न हो

मुझे याद है कि एक बार मैं अपने मौसा के साथ कहीं जा रही थी, तो मौसा ने बीच रास्ते में पड़ा पत्थर हटाया, ताकि कोई राहगीर या मवेशी उसकी वजह से चोटिल न हो जाए, तो साथ ही उन्होंने मुझे बताया था कि पैगम्बर मोहम्मद ने रास्ते से रोड़े, कांटे, रुकावटें हटाने को भी सवाब का काम बताया है|

दरअसल इस्लाम का दुष्प्रचार ही इस्लाम के दूर दूर तक फैलने की वजह बना लोगों ने इतनी बुराइयाँ की इस वजह से हर कोई इसे जानना चाहता था आखिर इस धर्म में क्या बात है

इन बातों से ही मेरे दिल में इस्लाम से मोहब्बत पैदा होना शुरू हुई, वरना इस्लाम के बारे में दुनिया वालों की फैलाई हुई गलतफहमियों में मैं फंस ही चुकी थी और मैंने अपनी इन्हीं आँखों से ये भी देखा कि जिन लोगों पर दबाव डालकर उनको मज़हबी बनाने की कोशिश की गई थी, वो तमाम लोग बाग़ी हो गए थे|

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यक़ीन जानिये, मज़हब के मामले में दूसरों को झिड़क, डंपट के आप उसे बग़ावत पर ही उकसाते हैं| इसलिये बेहतर है जितनी जल्दी आप ये बात समझ लें कि मज़हब आपसे थानेदार नही बल्कि एक रोलमॉडल का रोल निभाने की अपेक्षा करता है|

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दोस्तों आपकी जानकारी के लिए बता दें कि लेखक और सोशल एक्टिविस्ट अंजली शर्मा समय-समय पर इस्लाम पर अपने अनुभव अपनी फेसबुक प्रोफाइल और ब्लॉक के जरिए लोगों के बीच शहर करती हैं इससे पहले भी आपने कई बार इस्लाम के लिए कई लेख लिखें और अपने निजी अनुभव भी लोगों को बताए|