चेन्नई में मुसलमानों के खिलाफ बेकरी मालिक ने दिया ऐसा भड़काऊ विज्ञापन, हुआ गिरफ्तार

चेन्नई: इस वक्त पूरा देश एकजुट होकर कोरोना वायरस से संघर्ष कर रहा है. देश का हर नागरिक सरकार के बताई हुए गाइडलाइंस के मुताबिक नियमों का पालन कर रहा है लेकिन इस एकता को तोड़ने का प्रयास सरकार के ही नेता, मीडिया और आम लोग तक कर रहे हैं. सां’प्रदायिकता फैलाने वाले बयान और फ़ेक न्यूज़ चलाने का खेल रुक नही रहा बल्कि प्रतिदिन और तेज़ी से बढ़ता जा रहा है. ऐसा लग रहा है जैसे देश में कोरो’ना मुसलमानों ने ही फैलाया है।

अब खबर आ रही है.चेन्नई से जहां के एक मशहूर बेकरी मालिक पर आरोप है कि उन्होंने धार्मिक भेदभाव फैलाने वाला विज्ञापन बनवाया जैन बेकरी एंड कन्फेक्शनरी के मालिक ने मुस्लिमों को लेकर विज्ञापन देना भारी पद गया बेकरी मालिक को विवा’दि’त विज्ञापन (Controversial Advertisement) देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

दरअसल, चेन्नई की मशहूर बेकरी जैन बेकरी एंड कन्फेक्शनरी के मालिक ने धार्मिक भेदभाव फैलाने वाला विज्ञापन बनवाया और इस विज्ञापन पर लिखा गया था कि हमारे यहां मुसलमान कर्मचारी नहीं बल्कि जैन धर्म के स्टाफ सभी सामान बनाते हैं।

विज्ञापन की तस्वीर सोशल मीडिया पर भी कुछ दिनों पहले काफी वायरल हुई थी अब चेन्नई के जाने माने Jain Bakeries पर प्रशासन ने कार्रवाई की है. बेकरी के मालिक 32 साल के प्रशांत को मम्बालम पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

प्रशांत पर भारतीय दं’ड संहिता की धारा 295 A और 504 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. पुलिसिया तफ्तीश में यह भी पता चला है कि प्रशांत ने ही इस विज्ञापन को Whats app ग्रुप पर शेयर किया था जिसके बाद यह विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हुआ था।

चेन्नई के टी.नगर स्थित इस बेकरी के विज्ञापन में लिखा गया था कि ‘बेकरी का सामान जैन लोगों ने बनाया है. हमारे यहां कोई मुस्लिम स्टाफ नहीं है. विज्ञापन में लिखे इस वाक्य को पढ़ने के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसपर आपत्ति जताई जिसके बाद पुलिस ने बेकरी के मालिक पर यह कार्रवाई की है।

गौरतलब है की, हाल ही में उत्तर प्रदेश के मेरठ में स्थित वेलेंटिस कैं’सर अस्पताल ने अखबार में एक विज्ञापन छपवाया था इस विज्ञापन में लिखा गया था कि जो भी कैंसर के मुस्लिम मरीज अस्पताल न आएं उनसे अनुरोध है कि वो अपना और अपने तीमारदारों का कोरोना टेस्ट कराएं और रिपोर्ट नेगेटिव आने पर ही अस्पताल आएं।

अस्पताल के इस विज्ञापन को देखने के बाद कई लोगों ने इसपर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी आपत्तियों को देखते हुए बाद में अस्पताल ने उसी अखबार में अपनी तरफ से स्पष्टीकरण दिया और फिर इस विज्ञापन को हटाया गया और माफ़ी मांगी।