जेरूसलम का इतिहास: 2 बार नेस्तोनाबूत हुआ, 23 बार घेराव हुआ, 52 हम’ले और 44 बार कब्ज़ा किया गया

जेरूसलम का इतिहास अपने आप में बेहद दिलचस्प है दोस्तों यह वही जेरूसलम है जिसका जिक्र कुरान की सूरह असरा में आयत नंबर 17:1 में किया गया है जिसमें मस्जिद अल अक्सा का जिक्र किया गया है. आपको बता दें यहीं से हमारे नबी मेराज पर गए थे, और यह वही स्थान है जहां से हजरत इसराइल कयामत के दिन सूर फूंकेंगे. दुनिया भर में जितने भी मुसलमान कब्र में हैं वह इस दिन सूर फूंकने की वजह से उठ खड़े होंगे.

जेरूसलम का इतिहास भी रहस्यों से भरा हुआ है. बताते हैं की यह दो बार पूरी तरह से नेस्तनाबूद हो चुका था और इसको तकरीबन 23 बार फौजों द्वारा घेराव किया गया था. इस पर 52 बार हमले’ हुए हैं, और तकरीबन 44 बार इस पर कब्जा किया गया और इसको मुसलमानों से छीन लिया गया था.

बताया जाता है कि उमर खलीफा के शासनकाल के दौरान 637 ईसवी में इस पर मुसलमानों ने कब्जा कर लिया था और यह सब पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो सल्लम की वफात के 5 साल के अंदर ही हुआ था जेरूसलम को 1099 में क्रिश्चियन द्वारा कब्ज़ा किया गया था.

जहां मुस्लिम और यहूदी दोनों निवासियों का बड़े पैमाने पर नर सं@हार हुआ था. इसके बाद 1187 में फिर सलाउद्दीन अयूबी द्वारा जेरुसलम को फिर से वापस कब्जा कर लिया गया था. इस पर हुकूमत करने वाले कई लोग हैं जो अलग अलग वंशज से हैं.

बताते हैं कि सलाउद्दीन अयूबी के वंशज दूसरा हमसे जेरूसलम से 1247 में बाहर कर दिए गए थे और उसके बाद इन पर मॉम लुक्स का शासन था यह लोग वोही हैं जो पहले गुलाम हुआ करते थे और उन्हें मुस्लिम सैनिकों के रूप में वापस लाया गया था.

फिर इस पर मंगोलो का इतिहास भी दिलचस्प रहा है यहां लोगों को एक बात और जान लेनी चाहिए की यरुशलम में जो डोम ऑफ द रॉक जिसको मुस्लिम लोग (किबतुल सखरा) कहते हैं वह मस्जिदे अक्सा नहीं है.

दरअसल इसके अंदर एक चट्टान है जो जिसको (किबतुल सखरा) कहा जाता है और यहूदियों को इस तरह का इसमें विश्वास है कि यह जगह उनके पवित्र जीसस का स्थान है वही उन मुसलमानों का इस तरह मानना है कि आज हमने 2 हज़ार साल पहले जिब्रील ने इस जगह का दौरा किया था.

और जिस जगह से हजरत मोहम्मद सल्ला वसल्लम अल्लाह के दीदार के लिए मेराज पर गए थे उसे इंग्लिश में ‘नाइट जर्नी’ भी कहा जाता है. बताया जाता है कि यहां पर ऐसे रोचक तथ्य और ऐतिहासिक कहानियां हैं जिनका अभी तक कोई खास नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सकता है.

लेकिन एक बात तय है कि इस जगह का इतिहास अपने आप में एक रहस्यमई वातावरण पैदा करता है और किसी अलौकिक शक्ति का एहसास आपको इस जगह पर जरूर होता है. वही तस्वीरों में दिखाई गई कुछ ऐसी जगह और कलाकृतियां बनी हुई है जो अभी तक कहानियों के रूप में एक अनसुलझी पहेलियां ही हैं.

इनसे जुड़ी हुई अलग-अलग समुदाय के लोग अलग कहानी सुनाते हैं लेकिन इसका वास्तविक सच क्या है उसके पुख्ता सबूत अभी तक एक रहस्य ही बने हुए हैं .

फिलहाल येरूसलम पर मुसलमानों की दावेदारी जबरदस्त तरीके से है आने वाला वक्त कैसा होगा यह कोई नहीं बता सकता क्योंकि इस जगह पर 44 बार फेरबदल हो चुकी है यह भी अपने आप में काफी दिलचस्प है, क्योंकि इतिहास में किसी भी जगह देश पर इस तरह के इतनी बार कब से नहीं हुए स्पर्श करने वाले सांसों को शासकों का इतिहास भी अपने आप में एक बड़ी कहानी है जिसको पूरी तरह से जानने में कई महीनों का समय लग सकता है.

अभी हाल ही में मस्जिदे अल अक्सा पर तमाम रमजान भर नमाज हुई और कई जुमे की नमाज़ें भी वहां अदा की गयीं. इसके बावजूद फिर एक बार और वहां की पाक ज़मीन से मुसलमानों को फिर से हटाने के लिए इजराइल ने जोर जबरदस्ती की, शाम मुल्क के लोग जेरूसलम की धरती को कभी नहीं छोड़ेंगे चाहे रास्ते में कितनी रुकावट क्यों ना आ जाएँ.