जूता बनाने वाली कम्पनी Nike ने मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को भड़काया, दुनियाभर में कंपनी के खिलाफ आक्रोश

दुनिया की सबसे मशहूर जूता बनाने वाली अमेरिकन कंपनी ‘नाइक’ ने एक बार फिर दुनिया भर के मुसलमानों की भावनाओं को भड़काया है| इसका खुलासा तब हुआ जब एक ट्विटर यूजर ने अपने अकाउंट से ट्वीट कर इसकी जानकारी दी| उसके बाद देखते ही देखते तमाम सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर इसकी बहस गरमाने लगी| और दुनिया भर से तकरीबन डेढ़ अरब मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में, इस कंपनी के खिलाफ दुनिया भर से लोग अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं| और साथ ही इस अमेरिकन कंपनी से, माफी मांगने की मांग भी की जा रही है|

इससे पहले भी यह कंपनी एक बार और कुछ ऐसे ही कारणों से विवाद में आई थी तब भी उन्होंने अपने एक जूते पर जिस तरह का धार्मिक निशान चिन्हित कर लोगों को नाराज कर दिया था| लेकिन बाद में धीरे-धीरे मीडिया में यह बात गुम हो गई और मामला ठंडा बसते में चला गया|

यह तब की बात है जब सोशल मीडिया तना पावरफुल नहीं हुआ करता था लेकिन आज किसी भी बात को ना तो मीडिया दबा सकती है नजर में करने वाली कंपनियों के सोशल मीडिया यूजर का एक बहुत बड़ा तबका अब सतर्क रहने लगा है|

रश्या टूडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक मुस्लिम ग्राहक जिसका नाम सायक़ा नूरीन था| जब इन्होने इस बात पर गौर किया तो उन्होंने इस कंपनी के कृत्य की ओर दुसरे लोगों का ध्यान खींचने के लिए इसके ख़िलाफ़ एक ऑनलाइन अभियान शुरू किया|

नूरीन का कहना है कि एयर मैक्स जूते बनाने वाली नाईक कंपनी ने इस तरह से जूते को डिजाइन किया है, कि वह अरबी भाषा मैं अल्लाह शब्द से काफी समानता रखता है| अब इसके पीछे उनकी मंशा क्या रही या यह सब अनजाने में हुआ इससे कंपनी से बेहतर कोई नहीं जानता|

और इस कम्पनी से पवित्र नाम को जूतों के सोल यानी कि जूतों के तलों से मिटाने और ऐसे भेजे गए जूतों को मार्केट से वापस लेने की मांग करने लगे| फिलहाल इन्होने कंपनी पर इस्लाम की छवि खराब करने और दुनिया भर के मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया है|

इधर कंपनी वालों का कहना है कि यह जानबूझकर जी गई गलती नहीं है| कंपनी सभी धर्मों का सम्मान करती है| और हम किसी भी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचा सकते| यह एक तरह का स्टाइलिश ट्रेडमार्क लोगो है| जो इसके ब्रांड का एक सूचक मात्र है| किसी भी तरह से उसको जोड़ कर और इसका गलत अर्थ निकालना सरासर गलत है|

हालांकि इस मामले में कंपनी की राय भी एक तरह से सही है| अब सच क्या है यह तो कोई नहीं जानता, क्योंकि दोनों लोगों के तर्क अपनी अपनी जगह बिल्कुल सही है| नाइक दुनिया भर में पिछले कई सालों से अच्छा खासा व्यापार कर रहा है|

कंपनी भी कतई नहीं चाहेंगे की किसी समुदाय की जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की वजह से उनकी साख गिरे| ऐसा होना शायद इत्तेफाक ही हो ये उम्मीद करते हैं| फिलहाल दुनिय्भर के मुस्लिम गुस्से में हैं| उन्हें कौन समझाए|