देखें विडियो: कर्बला की जंग और इस लड़ाई का पूरा सच, कैसे शहीद हुए थे इमाम हुसैन

कर्बला की जंग के किस्से आप लोग पहले से भी सुते हुए आ रहे हैं| इन्टरनेट के आधार पर कुछ जगह बताया जाता है कि कर्बला की जंग अगर देखा जाय तो ये सिर्फ अरब के दो कबीलों जिनका नाम बनू उमय्या और बनू हाशिम था ये इन दोनों के बीच में हक और ईमान के वर्चस्व की लड़ाई थी| आपको बता दें कि इस लड़ाई के लिए जिहाद मतलब धर्म युध्ध का हुक्म नहीं हुआ था, ये सिर्फ और सिर्फ हक की लड़ाई थी जो बहुत लम्बी चली और इसकी शुरुआत जंगे बद्र से शुरू हुई थी|

जंग ए बद्र जिसमे हज़रत अली रजी0 और हजरत हमजा रजी0 ने अमीर मुआविया के नाना अबू उतबा और मामा को कत्ल किया था| जिसकी वजह से अबु सुफियान अमीर मुआविया और उनका खानदान हजरत अली और उनके खानदान से बदले की भावना रखता था|

जंगे बद्र के बाद जंगे उहद में मुआविया के वालिद अबू सुफियान के सिपाहियों ने हजरत हमजा रजी0 को शहीद कर दिया और अबू सुफियान की बीवी हिन्दा ने हजरत हमजा का कलेजा निकालकर चबा डाला। इसके बाद जंगे खन्दक में फिर अबू सुफियान ने मदीना पर हमला किया पर नाकामयाब रहे और वापस मक्का लौट गये|

और फिर आख़िर में पैगम्बर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के मक्का फतेह करने के बाद अंततः जब सभी मक्का के लोग इस्लाम मे दाखिल हो गये तो अबु सुफियान भी ने परिवार समेत इस्लाम कबूल कर लिया। पर अरब के इन दोनों कबिलो के बीच वर्चस्व की लड़ाई खत्म नही हुई और फिर हजरत उस्मान रजी0 जो कि खुद बनू उमय्या कबीले से थे उनके खिलाफत के आखरी साल विद्रोहियों की शक्ल में कुछ हत्यारो ने उनको शहीद कर दिया। जिसके बाद हजरत अली रजी0 खलीफा बने|

पर उनकी खिलाफत सीरिया के उस वक्त के गवर्नर अमीर मुआविया ने यह कहकर खारिज कर दिया कि पहले हजरत उस्मान के कातिलों को सजा दिलाई जाये फिर आपकी खिलाफत तय मानी जायेगी। नतीजा यह हुवा की इस्लाम की तारीख में पहली बार दोनो तरफ के मुस्लिम फौजी आमने सामने आ गये और भयंकर युध्द शुरू हुआ|

हजरत अली रजी0 ने जब दोनों तरफ मुसलमानो की ही लाशें गिरते देखा तो इस बात पर अमीर मुआविया से समझौता कर लिया कि मुल्के शाम जिसके की अमीर मुआविया गवर्नर थे वह उनके हुकूमत में रहेगा बाकी की इस्लामी खिलाफत हजरत अली रजी0 के हाथ मे होगी| पर जब हजरती अली भी ख़्वारिजियो के हाथ शहीद कर दिये गये तो अमीर मुआविया ने खुद को पूरे इस्लामी सल्तनत का खलीफा घोषित कर दिया|

जिसके वजह से हजरत हसन रजी0 और अमीर मुआविया के बीच फिर से जंग के इमकान पैदा हो गये।।पर हजरत हसन रजी0 ने जंग को टालने के लिये अमीर मुआविया से यह समझौता कर लिया कि उनकी खिलाफत तभी तक रहेगी जबतक वो जिंदा हैं उनके बाद खलीफा अमीर मुआविया के बेटे नही बनेंगे बल्कि हजरत हसन होंगे और यदि हजरत हसन जिंदा न रहे तो हजरत हुसैन होंगे या फिर निगराने शूरा अगले खलीफा के बारे में फैसला करेगा|

पर हजरत हसन के वफात के बाद अमीर मुआविया ने सारे समझौते को ताक पर रखकर अपने बेटे यजीद को अपना उत्तराधिकारी बना दिया। और वही वजह बनी कर्बला के जंग की जो लोग कर्बला की जंग में यह समझते हैं कि सुन्नियों ने हजरत हुसैन को कत्ल किया या जो लोग यह समझते हैं कि कूफ़ा के शियाओं ने हजरत हुसैन को बुलाकर धोखा दिया जिसकी वजह से उनकी शहादत हुई। वो दोनो तरह के लोग इस्लामी इतिहास को फिर से पढ़ लें|

नोट: पोस्ट में यदि कोई गलती नजर आये तो नीचे कमेंट करें, इसमे मजहबी एंगल निकालकर आपस मे बहसबाजी न करें दोस्तों इ  जंग का इतिहास इतना लंबा और अनसुना है जिसका एक पोस्ट में बता पाना बिलकुल नामुमकिन है|