भारी अर्थव्यवस्था की गिरावट से ध्यान हटाने के लिए कश्मीर मुद्दा उठाया गयाः साक्षी जोशी

कश्मीर में तनावपूर्ण स्थिति और सैनिकों की तैनाती बढ़ाने के बीच आज केन्द्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक के बाद राज्यसभा में होम मिनिस्टर अमित शाह ने जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 के खंड एक को छोड़कर सभी खंडों को खत्म करने का ऐलान किया। जिसके बाद जम्मू कश्मीर अब केन्द्र शासित प्रदेश बन जाएगा। इसके साथ ही लद्दाख को इससे अलग केन्द्र शासित प्रदेश बनाने का भी ऐलान किया गया।

जहां मोदी सरकार के इस फैसले का कुछ लोग समर्थन कर रहे हैं वहीं कुछ लोग इस फैसले को संविधान और लोकतंत्र के ख़िलाफ बता रहे हैं। इसके अलावा कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनका मानना है कि सरकार ने ये मुद्दा गिरती अर्थव्यवस्था पर अपनी नाकामी को छुपाने के लिए उठाया है। जिससे इसपर कोई चर्चा ही न हो पाए।

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मोदी सरकार के इस फैसले को लेकर पत्रकार साक्षी जोशी ने ट्विटर के ज़रिए दावा किया कि मोदी सरकार गिरती अर्थव्यवस्था से ध्यान भटकने के लिए कश्मीर के मुद्दे को उठा रही है। उन्होंने लिखा गिरती अर्थव्यवस्था से ध्यान हटे 15 अगस्त की स्पीच में बोलने के लिए बढ़िया बातें मिल जाएं और जम्मू कश्मीर में चुनाव जीत सकें।

पत्रकार साक्षी जोशी ने लिखा की उसके लिए ऐसी हरकत जहां कश्मीर के आम नागरिक इतने परेशान हो रहे हैं बेहद दुखद है। अगर बल से ही कुछ करना था तो अटल जी भी कर लेते। लेकिन उन्होंने नहीं किया।

आपको बता दें कि पिछले कुछ दिनों से जम्मू-कश्मीर में उथल-पुथल देखने को मिल रही है। सूबे में अचानक भारी संख्या में सेना बलों की तैनातगी और अमरनाथ यात्रा को रोके जाने के बाद तमाम अटकलें लगाई जा रही थीं कि आखिर मोदी सरकार क्या करना चाह रही है। आख़िरकार सोमवार को इन अटकलों पर पूर्णविराम लग गया जब सरकार ने राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर को लेकर संकल्प पत्र पेश किया।

बता दें राज्यसभा में गृहमंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर को लेकर सरकार का संकल्प पत्र पेश करते हुए कहा कि कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधान हटा दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर अब केंद्र शासित प्रदेश होगा जहां विधानसभा के चुनाव होंगे। दूसरा लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश होगा जहां एलजी के हाथ में कमान होगी।

आपको बता दें मोदी सरकार के इस फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर ने 17 नवंबर 1956 को जो अपना संविधान पारित किया था, वह पूरी तरह से खत्म हो गया है यानी अब राज्य में भारतीय संविधान पूरी तरह से लागू होगा। जम्मू-कश्मीर को अब विशेषाधिकार नहीं मिलेंगे।