11 साल बाद CRPF हम’ले के केस के आरो’पों से बरी हुए कौसर और गुलाब खान, सुनाई द’र्द भरी द’स्ता…

रामपुर: 31 दिसंबर 2007 और 1 जनवरी 2008 की वो रात जब जिले के CRPF के ग्रुप सेंटर पर हम’ला हुआ था. इस हम’ले में 7 सीआरपीएफ जवान शही’द हो गए थे साथ ही एक रिक्शा चालक की भी मौ’त हो गई थी. इस हम’ले के बाद पुलिस ने 8 आतं’कि’यों को गिरफ्ता’र किया था, जिनकी सुनवाई रामपुर एडीजी थर्ड न्यायालय में चल रही थी. जिसको 11 साल बाद मोहम्मद कौसर और गुलाम खान बरी कर दिया गया। हालांकि, दोनों इस बात को लेकर संश’य में हैं क्या कोर्ट का आदेश उन पर लगा आ’तं’की होने का दा’ग मिटा पाएगा?

आपको बता दें कि गिरफ्ता’र होने से पहले 48 साल के कौसर खान प्रतापगढ़ के कुंडा इलाके में एक इलेक्ट्रॉनिक्स की एक छोटी सी दुकान चलाते थे। वहीं, 41 साल के गुलाम खान की बरेली के बहेड़ी इलाके में एक वेल्डिंग की दुकान थी। इन दोनों की गिरफ़्ता’री के बाद दोनों के परिवारों ने मुकदमा लड़ने के लिए न केवल अपने घर बेचे बल्कि अपनी दुकानें भी बेच दीं और घर में जो भी कुछ था सब केस में लगा दिया।

गुलाब खां और कौसर 12 साल जेल में बिताने के बाद दोनों का कहना है कि उनके लिए अब दोबारा से जिंदगी पटरी पर लाना बहुत मुश्किल होगा। बता दें कि शनिवार को रामपुर की अदालत ने 2008 के ह’म’लों के लिए चार आरोपियों को मौ’त की सजा सुनाई। इनमें दो पाकिस्तानी नागरिक हैं। इस हम’ले में सीआरपीएफ के 7 जवान शहीद हो गए थे जबकि एक रिक्शा’चाल’क की भी जा’न चली गई थी।

वही पांचवें आरोपी को उम्रकै’द की सजा दी गई है। इस हम’ले से पहले अपरा’ध में इस्तेमाल ह’थिया’र अपने घरों में छिपाने के आरोपी खान और कौसर को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।

आपको बता दें हम’ले के एक महीने बाद 9 फरवरी को कौसर को उसकी प्रतापगढ़ स्थित दुकान से गिरफ्ता’र किया गया। यह जगह रामपुर से 486 किमी दूर स्थित है। कौसर ने फोन पर द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बताया, की एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने मुझसे दो या तीन सवाल पूछे और फिर एक कमरे में ले गए। दो दिन बाद, मुझे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से मुझे जे’ल भेज दिया गया।

कौसर ने 9वीं कक्षा तक पढ़ाई की है। और वह सऊदी अरब में एक इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान पर 10 साल काम कर चुके हैं। जिसके बाद वह 2005 में भारत लौटे थे। उन्होंने बताया कि गिरफ्ता’री के बाद उनकी दुकान को चलाने के लिए परिवार में कोई नहीं था माली संक’ट की वजह से दुकान को बेचना पड़ा और मेरे तीन बच्चों को स्कूल की पढ़ाई छोड़नी पड़ी।

वही कौसर ने कहा की मेरी पत्नी सलमा बानो को आजीविका चलाने के लिए कपड़े सिलने पड़े। रिश्तेदारों ने मेरे घर आना जाना बंद कर दिया। केस लड़ने के लिए पैसे जुटाने के लिए परिवार ने बाद में दुकान बेच दी। वही जेल से रिहा होने के बाद कौसर ने कहा की उनकी तकलीफें फिलहाल खत्म नहीं होने वाली हैं।

उन्होंने कहा की लोग मुझपर आसानी से भरोसा नहीं करेंगे जिसने एक दशक का वक्त जेल में बिताया हो। कोर्ट ने मुझे बरी कर दिया लेकिन यह नहीं मानेंगे कि मैं बेकसूर हूं। मुझे उनका भरोसा वापस पाने के लिए दोबारा से संघ’र्ष करना होगा।

वहीं गुलाम खान की पत्नी नजारा ने कहा कि मैं ऊपरवाले का अपने पति की रिहाई के लिए शुक्रिया करती हैं। उनके मुताबिक उन्हें भरोसा था कि मेरे पति एक दिन जरूर वापस लौटेंगे क्योंकि उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया था। बता दें कि खान को बरेली स्थित अपनी दुकान से 10 फरवरी को गिरफ्ता’र किया गया था। यह जगह रामपुर से 70 किमी दूर स्थित है।

गुलाम खान ने बताया कि मेरे जेल जाने के बाद पत्नी कपड़े सिलने का काम करने लगीं लेकिन इससे सिर्फ खाने पीने का ही इंतजाम हो पाता था। बिल न भरने की वजह से उनके घर का बिजली कनेक्शन तक काट दिया गया। खान के बड़े भाई कमाल खान ने बताया कि उनके तीन बच्चों को स्कूल छोड़ना पड़ा क्योंकि वे फीस चुकाने में सक्षम नहीं थे। वहीं, खान के बहनोई मोहम्मद शहीन ने बताया कि ये 11 साल बेहद मुश्किल भरे रहे।