90 साल बाद 2500 करोड़ रूपए की संपत्ति हुई वक्फ बोर्ड के नाम, हो रहा था अवैध कब्जा

झारखंड के हजारीबाग सिविल कोर्ट ने वक्फ बोर्ड के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाते हुए पटना के डाकबंगला चौराहा से फ्रेजर रोड तक स्थित हसन इमाम वक्फ स्टेट की जमीन पर बनी हुई इमारतों का फैसला 90 साल के बाद शिया वक्फ बोर्ड के पक्ष में दिया हैं. टाइटल सूट के इस फैसले के बाद वक्फ स्टेट की जमीन पर निर्मित सेंट्रल मॉल, विशाल मेगा मार्ट, कौशल्या एस्टेट, वन मॉल, एक अंग्रेजी अखबार की बिल्डिंग के आलावा फजल इमाम कॉम्प्लेक्स और एसपी वर्मा रोड पर बने साकेत टावर और बंदर बगीचा में 5 बीघा जमीन का मालिकाना हक अब शिया वक्फ बोर्ड का हो चूका हैं.

बिहार राज्य शिया वक्फ बोर्ड अध्यक्ष इरशाद अली आजाद ने जानकारी दी कि मौजूद समय में हसन इमाम की जमीन पर साकेत टावर, सेंट्रल मॉल, कौशल्या स्टेट, विशाल मेगामार्ट और इंग्लिश अख़बार टाइम्स ऑफ इंडिया भवन बना हुआ हैं.

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उन्होंने बताया कि नियमों के अनुसार वक्फ की संपत्ति न बेची जा सकती और न ही खरीदी जा सकती है. टाइटल सूट के चलते बोर्ड इस मामले में कोई कदम नहीं उठा पा रहा था लेकिन अब टाइटल सूट जीतने के बाद हसन इमाम की इस संपत्ति का मालिक वक्फ बोर्ड हो गया हैं.

ऐसे में अब वक्फ की जमीन का इस्तेमाल करने के लिए या तो किराया चुकाना होगा या फिर लीज पर जगह ली जा सकती हैं. उन्होंने बताया कि साकेत टावर में रहने वालों लोगों को अगले सप्ताह ही वक्फ बोर्ड नोटिस जारी कर देगा.

जबकि अन्य भवनों में स्थित दुकानदारों की भी लिस्ट शिया वक्फ बोर्ड द्वारा बनाई जा रही है और सूची बनते ही उन्हें भी नोटिस थमा दिए जाएगें. वक्फ के नियमों के मुताबिक 3 से 30 वर्षों तक लीज प्राप्त की जा सकती हैं.

बोर्ड के चेयरमैन ने बताया कि हसन इमाम पटना के चर्चित बैरिस्टर थे. उन्होंने अपनी इन संपत्तियों को 1929 में वक्फ के नाम कर दिया था. हसन इमाम ने दो निकाह किये थे पहली पत्नी को संपत्ति के दस आना का मुतावल्ली बनाया गया था जबकि दूसरी पत्नी जो की अंग्रेज थी उन्हें छह आना का मुतावल्ली बनाया गया था.