कुर्बानी करने से पहले ये बातें जो अक्सर लोग नज़रंदाज़ कर जाते हैं, आपको भी जान लेना चाहिए

क़ुरबानी के लिए बकरा बकरी की उम्र 1 साल मुतय्यन है कि अगर इसमें एक दिन भी कम होगा तो जानवर हलाल है मगर क़ुरबानी हरगिज़ न हुई मगर अबु दर्दा रज़ियल्लाहु तआला अन्हु को 6 माह के बकरी के बच्चे को क़ुरबानी के लिए इजाज़त अता फरमाई,ये है इख़्तियारे मुस्तफा सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम|

हदीस जो आपको ज़रूर पड़ना चाहिए

निकाह में लाओ जो औरतें तुमको खुश आएं दो दो तीन तीन और चार चार… अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने तमाम मुसलमानों को ये हुक्म दिया है कि अगर सबमें इंसाफ़ कर सको तो 4 बीवियां एक साथ रख सकते हो वरना एक ही काफी है| और ये क़ानून सब के लिए बराबर है और क़यामत तक के लिए है| मगर इसके खिलाफ जब हुज़ूर ने अपनी प्यारी बेटी हज़रते फातिमा ज़ुहरा रज़ियल्लाहु तआला अन्हा का निकाह मौला अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से किया तो फ़रमाया कि ऐ अली जब तक फ़ातिमा तुम्हारे निक़ाह में है तुमको दूसरा निकाह हराम है|

और आपके इस फैसले के खिलाफ ना तो मौला अली ने कुछ कहा ना तो किसी सहाबी ने और तो और खुद रब्बे ज़ुल्जलाल ने भी ऐतराज़ नहीं किया कि ऐ नबी हम तो चार औरतों को एक साथ रखने का हुक्म दे रहे हैं और आप दूसरी को ही हराम किये देते हैं, ये है इख़्तियारे मुस्तफा सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम|

शरई गवाही के लिए 2 मुसलमान आक़िल बालिग़ मुत्तक़ी होने चाहिए ये फरमान क़ुरान का है मगर हुज़ूर ने हज़रते खुज़ैमा रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की अकेले की गवाही को 2 मुसलमान मर्दों की गवाही के बराबर क़रार दिया,ये है इख़्तियारे मुस्तफा सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम|

दिन भर में 5 वक़्त की नमाज़ फ़र्ज़ है अगर कोई इंकार करे तो काफ़िर हो जाए मगर एक सहाबी इस शर्त पर ईमान लाये कि वो दिन भर में 2 वक़्त की ही नमाज़ पढ़ेंगे और हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम ने उन्हें इजाज़त अता फरमाई| सल्तनते मुस्तफा, सफह 27

जब हज फ़र्ज़ हुआ तो एक सहाबी ने कहा कि क्या हर साल फ़र्ज़ है इस पर हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि अगर हम हां कह दें तो हर साल फ़र्ज़ हो जाएगा|

एक सहाबी ने रमज़ान में रोज़े की हालत में अपनी बीवी से सोहबत कर ली तो सरकार सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम ने उन पर कफ्फारह लाज़िम फ़रमाया कि 60 रोज़े लगातार रखो उन्होंने माज़रत चाही फिर आपने कहा कि 60 मिस्कीन को खाना खिलाओ या कपड़े पहनाओ|

इस पर वो बोले कि मेरी इतनी हैसियत नहीं है तो हुज़ूर ने उन्हें कुछ देर रुकने को कहा कुछ देर में ही हुज़ूर के पास एक टोकरी खजूर हदिये में आया आपने उन सहाबी से फ़रमाया कि इसे ले जा और गरीबों में बांट दे तो वो कहते हैं कि हुज़ूर मदीने में मुझसे ज्यादा गरीब कोई नहीं है तो आप सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम मुस्कुरा देते हैं और फरमाते हैं कि ठीक है इसे ले जा खुद खा और अपने घर वालों को खिला तेरा कफ़्फ़ारह अदा हो जाएगा, ये है इख़्तियारे मुस्तफा सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम|

मौला अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की अस्र की नमाज़ क़ज़ा हो गयी जिस पर हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम ने डूबे हुए सूरज को ही वापस लौटा दिया कि अली अपनी नमाज़ अदा फरमा लें|

एक आराबी आपकी खिदमत में हाज़िर हुआ कि मुझे कुछ मोजज़ा दिखाएं तो मैं ईमान ले आऊं इस पर आप फरमाते हैं कि जा जाकर उस दरख़्त से कह कि तुझे अल्लाह के रसूल सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम बुलाते हैं जैसे ही उस आराबी ने जाकर उस पेड़ से ये कहा फ़ौरन वो दरख़्त अपनी जड़ों को घसीटता हुआ हुज़ूर की बारगाह में हाज़िर हो गया ये देखकर आराबी फ़ौरन ईमान ले आया|

एक मर्तबा अबु जहल ने हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम से कहा कि अगर आप नबी हैं तो चांद के दो टुकड़े करके दिखाइये इस पर आपने उंगली के इशारे से चांद के दो टुकड़े फरमा दिए,और इसका गवाह ख़ुद क़ुराने मुक़द्दस है|

किसी मुसलमान मर्द व औरत को ये हक़ नहीं पहुंचता कि जब अल्लाह व रसूल कुछ हुक्म फरमा दें तो उन्हें अपने मामले का कुछ इख़्तियार रहे|

हुज़ूर ने अपने ग़ुलाम हज़रत ज़ैद बिन हारिस रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के निकाह का पैग़ाम हज़रत ज़ैनब बिन्त हजश रज़ियल्लाहु तआला अन्ह को दिया जिस पर उन्होंने इन्कार कर दिया, इस पर ये आयत उतरी और हज़रत ज़ैनब को निकाह करना पड़ा,ये है इख़्तियारे मुस्तफा सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम|

सुलह हुदैबिया के मौक़े पर जब सहाबियों के पास पानी ख़त्म हो गया तो सब हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम के पास पहुंचे इस पर आपने एक प्याले में अपनी उंगलियां मुबारक डुबो दी तो फ़ौरन उसमे से पानी उबलने लगा हज़रते जाबिर फरमाते हैं कि हम 1500 की तादाद में थे और उस पानी ने सबको किफ़ायत किया,ये है इख़्तियारे मुस्तफा सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम|