लब्बैक ‘या रसूल अल्लाह’ के नारों से गूंजे मुस्लिम देश, नीदरलैंड को दिखा दी उसकी ओकात

आगामी दिनों में यूरोपियन देश नीदरलैंड्स में एक प्रतियोगिता आयोजित होने जा रही है और इस प्रतियोगिता में पैगंबर हज़रत मोहम्मद पर आधारित कार्टून प्रतियोगिता को रद्द कर दिया गया है. इस प्रतियोगिता के विरोध में कई जगह मुस्लिम समुदाय के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया था. गौरतलब है कि इस्लाम में किसे भी तरह की मूर्ती पूजा को हराम बताया गया है|

दुनियाभर में हुए थे प्रदर्शन

और जब मूर्ती नहीं तो उसका चित्र भी क्यों हो| मतलब वो निराकार शक्ती जिसे सारी दुनिया के मुसलमान मानते हैं इसका वजूद तो है लेकिन वो दीखता नहीं| आपको बता दें कि इस्लाम में किसी भी सहबा या नबी की तस्वीर बनाना पूरी तह से निषेध है| आपको बता दें कि इस बारे में कुछ साल पहली भी ऐसा ही हज़रात साहब के विषय में कार्टून बनाने का मामला सामने आया था, जिसका दुनियाभर में विरोध हुआ था|

और नीदरलैंड्स की इस प्रतियोगिता में हजरत मोहम्मद की तस्वीर या का कार्टून पर एक प्रतियोगिता राखी गयी थी जिसका विरोध दुनिअभर के मुस्लिम देशों में किया गया था| अधिकतर मुसलमान ऐसे किसी भी फोटो या स्केच को आपत्तिजनक मानते हैं.

आपको ये बात पता होना चाहिए कि पकिस्तान में इस तरह की गुस्ताखी करने वालों के लिए सज़ा ए मौत तक का प्रावधान है| ईशनिंदा पाकिस्तान में प्रतिबंधित है| इसके लिए आपको मौत की सजा दी जा सकती है|

पिछले गुरुवार को पाकिस्तान के लाहौर और इस्लामाबाद समेत दुनिया के और भी देशों में लोगों ने इस प्रतियोगिता के विरोध में काफी बड़ी रैलियां निकालकर अपना विरोध दर्ज करवाया था| इससे पहले ये तय था कि इस प्रतियोगिता को 2018 के दिसम्बर तक में आयोजित कर दी जायेगी|

इसके अलावा पाकिस्तान की तरफ से भी इस विवादित आयोजन के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र में भी शिकायत दर्ज करा दी गयी थी| इसके अलावा डच राजदूत को भी इस बात की जानकारी दे दी गयी थी|