मनोहर पर्रिकर के लिए बीजेपी मुख्यालय में पढ़ी गई थी कुरआन, आर्कबिशप ने भी की थी दुआ की अपील

गोवा के मुख्यमंत्री और पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर का रविवार देर शाम उनके निजी आवास पर निध’न हो गया. मनोहर पर्रिकर महज 63 साल के थे. पर्रिकर चार बार गोवा के मुख्यमंत्री रहे है और नरेंद्र मोदी सरकार में रक्षा मंत्री का पद भी संभाल चुके है. पर्रिकर फरवरी 2018 से ही अग्नाशय संबंधी बीमारी से जूझ रहे थे. पिछले एक साल से बीमार चल रहे बीजेपी के वरिष्ठ नेता का स्वास्थ्य दो दिन पहले काफी ज्यादा बिगड़ गया था.

सूत्रों के अनुसार पूर्व रक्षा मंत्री पर्रिकर शनिवार देर रात से ही जीवनरक्षक प्रणाली पर थे. राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री का नि’धन रविवार शाम छह बजकर चालीस मिनट पर हुआ. मनोहर पर्रिकर पैन्क्रियाटिक कैंसर से जिंदगी की जंग हा’र गए.

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आपको बता दें कि पर्रिकर की मृ’त्यु से पहले उनकी सलामती के लिए बीजेपी मुख्यालय में दस मौलवियों ने इस्लाम धर्म की पवित्र किताब कुरआन का पाठ भी किया था. इसके आलावा राज्य के आर्कबिशप फिलिप नेरी फेराओ ने भी कैथोलिक समुदाय से उनके लिए प्रार्थना करने की अपील की थी.

ऐसा आखिर तक चलता रहा क्योंकि पर्रिकर बीजेपी के उन चंद नेताओं में से एक थे जिनकी छवि धर्मनिरपेक्ष नेता के रूप में मानी जाती थी. पर्रिकर स्वभाव से काफी मिलनसार थे. पर्रिकर ने एक आरएसएस प्रचारक के तौर पर शुरुआत करके गोवा के सीएम की कुर्सी तक का सफ़र किया था.

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पर्रिकर एक साफ छवि वाले नेता रहे इसलिए उन्हें नरेंद्र मोदी ने देश के रक्षा मंत्री पद के लिए चुना था. उस समय वह गोवा सीएम थे और इस्तीफा देकर मोदी सरकार में शामिल हुए थे. पर्रिकर की छवि हमेशा ही बहुत सरल और सामान्य व्यक्ति की रही. सिर्फ बीजेपी ही नहीं बल्कि दूसरे दलों के लोग भी उनका मान-सम्मान करते थे.

वह पर्रिकर ही थे जिन्होंने लंबे समय तक कांग्रेस का गढ़ रहने वाले गोवा में क्षेत्रीय संगठनों में बीजेपी की पकड़ मजबूत बनाई. 13 दिसंबर, 1955 को एक मध्यमर्विगय परिवार में जन्मे पर्रिकर आईआईटी बंबई से स्रातक थे. वह 2014 से 2017 तक मोदी सरकार की कैबिनेट में रक्षा मंत्री रहे. केन्द्र सरकार ने उनके निध’न पर सोमवार को राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है.