मस्जिद कमेटी द्वारा बड़ा फैसला, जहाँ डीजे और आतिशबाज़ी होगी वहां निकाह पढ़ाने नहीं जायेंगे

मध्यप्रदेश: भोपाल शहर में मुस्लिम समुदाय की मस्जिद कमेटी ने एक अहम फैसला लेते हुए जिस शादी में पटा’खेबाजी और डीजे शामिल होगा, तो वहां ये लोग निकाह पढ़ने नहीं जायेंगे. इस तरह का फैसला लिया है। शहर के कोई भी काजी या अन्य नायब काज़ी ऐसे तमाशे वाले निकाह नहीं पढ़ाएंगे।

मस्जिद कमेटी ने मुस्लिम समुदाय में फैले कुछ गलत तरीके के रीति रिवाजों को दूर करने के लिहाज से यह फैसला लिया है। अक्सर हमने देखा है कि शादी व्याह के वक़्त समाज में दिखावे और बिला वजह के खर्चों को तरजीह दी जाती है, जिसका कोई मतलब नहीं. अब मस्जिद कमेटी के इस फैसले को समुदाय में फैले हुए गलत रिति रीवाजो की कवायद मान लिया गया है।

शुक्रवार दोपहर जुमे की नमाज़ के बाद हुआ ऐलान

Baad Jume Ki Namaaz

इसके पहले भी बीते शुक्रवार को दोपहर जुमे की नमाज़ के बाद, दमोह जिले की सभी मस्जिदों में भी एक ख़ास ऐलान किया गया था, और शहर के काज़ी द्वारा एक लिखित पत्र मस्जिदों में बाद पढ़ा गया था. हालाँकि उत्तर प्रदेश से भी ये खबर आ रही है कि वहां के मुजफ्फरनगर में ये रिवाज काफी वक़्त से चला आ रहा है.

इस पत्र में यह साफ साफ सूचित किया गया है कि शहर के काज़ी सहित तमाम हाफिजों ने ये निर्णय लिया कि मुस्लिम समुदाय में फैले गलत रीति रिवाजों को जड से मिटा दिया जाये।

दोनों पक्षों से लिखित लेने के बाद ही निकाह होगा

मुस्लिम समाज में शादीयों के अवसर पर हो रहे नाच गाने, डी जे और पटाखे जलाना जैसी गलत हरकतों से समाज को निजात दिलाने के लिए एक अहम फैसला लेते हुए शहर के काजी ने कहा कि, “आज के बाद से हम और शहर के इमाम उन लड़के लड़कियों की शादियों में नहीं जायेंगे जहाँ डी जे और डान्स के तमाशे होगे और ना ही हम लोग वहां निकाह पढ़ायेंगे।

शहर के काजी ने इस से आगे ऐलान में ये भी कहा कि लड़का पक्ष और लड़की पक्ष दोनों से लिखित दस्तख़त लेने के बाद ही शादियों में निकाह पढ़ाने की इजाजत होगी। बिना इसके शहर का कोई काज़ी किसी भी शादी में निकाह पढवाने के लिए नहीं जा सकेंगे.

दोंनो पक्ष इस बात पर राजी होंगे कि हमारे यहाँ की शादी में कोई गैर इस्लामी काम नहीं किया जाएगा, तभी काजी उनके यहाँ निकाह पढ़ाने जाएंगे। शहर के काजी और इमामों के मुताबिक इस फैसले से मुस्लिम समाज में एक बहुत बड़ा सुधार आएगा।