मस्जिद में दाखिल होने से पहले अगर ये पढ़ लोगे तो बुराई करने वालों के मुहँ बंद हो जायेंगे…

हमने अक्सर देखा है हमारे आसपास कुछ लोग ऐसे जरूर पाए जाते हैं जो हमेशा सारे दिन दुसरे लोगों में मीन मेख निकालते रहते हैं| आपको ये पता होना चाहिए एक ईमान वाले का दुसरे किसी भी इंसान की बुराई या चुगली करना बहुत ही बड़ा गुनाह बताया गया है|

कुछ लोग इस आदत से इतना मजबूर होते हैं कि जब तक सुबह से लेकर शाम तक 10 लोगों की बुराइयाँ न कर दें इनका पेट नहीं भरता| फिर भी इस्लाम में ऐसे लोगों के के मुंह बंद कराने के लिए इंतजाम किए गए हैं| लोगों की बुराई से बचने के लिए इंशाल्लाह नीचे दिए गए अमल को करेंगे तो लोगों की नजरों में आप हमेशा इज्जत से देखें जाएंगे और आपके बुराइयां चुगलखोरी करने वाले लोगों की रुसवाई होगी|

बुराई से महफूज़ होने के लिए ये पढ़ें

अम्र बिन आस रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की जब भी अल्लाह के रसूल हुज़ूर रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहु अलैही वसल्लम मस्जिद में तशरीफ़ ले जाते तो आप अन्दर जाने से पहले ये आयात पढ़ा करते|

أَعُوذُ بِاللَّهِ الْعَظِيمِ وَبِوَجْهِهِ الْكَرِيمِ وَسُلْطَانِهِ الْقَدِيمِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ

इसका मतलब है कि मैं अल्लाह की अज़मत की और उसकी ज़ात ए करीम की और उस क़दीम बादशाहत की शैतान मरदूद से पनाह चाहता हूँ| जो कोई शख्श ए कि वो लोगों और शैतानी बुराई से बचे तो उसको चाहिए मस्जिद में दाखिल होने से पहले इस आयात को ज़रूर पढ़ें| जब मस्जिद में दाखिल होने वाला आदमी ये कहता है तो शैतान भी ये कहता है अब वो मेरी बुराई से दिन भर के लिए महफूज़ हो गया| साभार: सुन्नान अबू दाऊद जिल्द 1, हदीस 463-सही

उर्दू भाषा में देखें

عمرو بن العاص رضی اللہ عنہما سے کی ہے کہ آپ صلی اللہ علیہ وسلم جب مسجد میں تشریف لے جاتے تو فرماتے:

أَعُوذُ بِاللَّهِ الْعَظِيمِ وَبِوَجْهِهِ الْكَرِيمِ وَسُلْطَانِهِ الْقَدِيمِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ

(میں اللہ عظیم کی، اس کی ذات کریم کی اور اس کی قدیم بادشاہت کی مردود شیطان سے پناہ چاہتا ہوں )
جب مسجد میں داخل ہونے والا آدمی یہ کہتا ہے تو شیطان کہتا ہے: اب وہ میرے شر سے دن بھر کے لیے محفوظ کر لیا گیا۔
سنن ابو داوود جلد ١ حدیث : ٤٦٣ – صحیح

हिन्दी रोमन में देखें

Amr bin aas Radi Allahu anhu se rivayat hai ki Rasool-Allah Sal-Allahau Alaihi wasallam jab masjid mein tashrif le jaate to farmate

أَعُوذُ بِاللَّهِ الْعَظِيمِ وَبِوَجْهِهِ الْكَرِيمِ وَسُلْطَانِهِ الْقَدِيمِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ

Aawuzu billahil-Azim, Wa bi-Wajhihil-Karim, wa Sultanihil-qadim, minash-Shaytanir-rajim
Main Allah ki azmat ki aur uski zaat e kareem ki aur uski qadeem badshahat ki shaitan mardud se panah chahta hu

Aur jab masjid mein dakhil hone wala aadmee ye kahta hai to shaitan kahta hai ab wo mere shar se din bhar ke liye mehfooz ho gaya. Sunnan Abu Dawud Jild 1, 463-Sahih