अयोध्या: सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बोले मौलाना महमूद मदनी कहा- न्यायपालिका ने अल्पसंख्यकों के भरोसे को…

नई दिल्ली: शनिवार को न्यायपालिका ने वर्षो पुराने विवाद रामजन्मभूमि और बाबरी मस्जिद को लेकर अपना फैसला सुना दिया फैसला आने के बाद राजनीतिक दलों और नेताओं सहित तमाम ललोगो की प्रतिक्रिया आ रही है. रामजन्मभूमि और बाबरी मस्जिद मामले को लेकर जहाँ कई लोग इस फैसले का स्वागत कर रहे तो वही कई लोग इस फैसले से न खुश है। अब इस फैसले पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर गहरी असहमति प्रकट की है।

रविवार को जारी मौलाना मदमूद मदनी ने एक बयान में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर गहरी असहमति प्रकट की और कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की पीठ ने मूर्ति रखे जाने और बाबरी मस्जिद गिराए जाने को को लेकर कानून के शासन का सरासर उल्लंघन माना लेकिन इसके बावजूद जमीन ‘ऐसे अपरा’ध करने वालों को दे दी गई।

उन्होंने कहा, यह उस विशेष समुदाय के खिलाफ स्प’ष्ट भेदभाव है, जो अदालत की ओर से अपेक्षित नहीं था। फैसले ने न्यायपालिका में अल्प’संख्य’कों के विश्वास को हिला कर रख दिया है क्योंकि उनका मानना है कि उनके साथ अन्याय हुआ है। मदनी ने इस फैसले को सच्चाई और सुबूतों को नजरअंदाज करने वाला बताया है।

मदनी ने कहा कि यह एक विशेष वर्ग के विरुद्ध सरासर भेदभाव हुआ है जिसकी बिल्कुल भी आशा नहीं थी। इस फैसले से न्यायालय पर अल्पसंख्यकों का विश्वास डगमगा रहा है कि उनके साथ न्याय के बजाए अन्याय हुआ है। मदनी ने कहा कि जब देश आजाद हुआ और यहां भारतीय संविधान को लागू किया गया तो उस समय भी वहां मस्जिद थी।

अयोध्या में पीढियों से लोगों ने मस्जिद देखि है कि वहां मस्जिद थी और लोग नमाज पढ़ते थे। यह सुप्रीम कोर्ट की जिम्मेदारी है कि वह संविधान की हिमायत करे और भारतीय संविधान में दर्ज मुसलमा’नों की धार्मिक इबादत और धार्मिक स्वतंत्रता की सुरक्षा के लिए फैसला करे, जिसमें बाबरी मस्जिद में भी इबादत का हक शामिल है।

आपको बता दें मौलाना महमूद मदनी ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस गांगुली के बयान का हवाला देते हुआ कहा है कि इतिहास के विद्यार्थी होने के बावजूद उनके लिए यह फैसला न समझ में आने वाला है।

वही मौलाना कहा की हम धैर्य और सहनशीलता के साथ स्थितियों का मुकाबला करेंगे और झूठी सां’त्वना’ओं पर भरोसा कर’ने के बजाए उससे भी अधिक कठोर धै’र्य वाली परिस्थि’तियों के लिए मन मस्तिक से पूरी तरह तैयार रहें और अल्लाह की रस्सी को मजबूती से थामे रहें।