VIDEO: जबेदा बेगम के बाद अब पढ़िए मोहम्मद फखरुद्दीन की दर्दभरी दास्तां, नागरिकता साबित करने में जुटे 19 लाख

नई दिल्ली: असम की फ़ाइनल NRC लिस्ट से बाहर हो गए लाखों लोग नागरिकता साबित करने के लिए हर कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में गोवाहाटी हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल ऑफ असम द्वारा विदेशी घोषित की गई असम की जबेदा बेगम की याचिका को यह कहकर खारिज कर दिया कि जमीन के कागजात, पैन कार्ड और बैंक डॉक्यूमेंट से नागरिकता साबित नहीं हो सकती है।

फ़ाइनल NRC लिस्ट से बाहर हो गए लाखों लोगो में कई ऐसे लोग हैं जिनके पास काग़ज़ात तो बहुत हैं लेकिन इस वक्त कोई काग़ज़ उनके काम नहीं आ रहा है. इसी मामले में पर जबेदा की कहानी तो आप लोगो ने सुनी होगी लेकिन कुछ वैसा ही हाल मोहम्मद फखरुद्दीन का है।

आपको बता दें 41 साल के मोहम्मद फखरुद्दीन खान असम के उन 19 लाख लोगों में से एक हैं जिन्हें पिछले साल अगस्त में जारी हुई एनआरसी की फाइनल लिस्ट से बाहर कर दिया गया। वो असम के होजाई ज़िले के डोबोका में एक छोटे कारोबारी हैं।

गौरतलब है की यह लोग पिछले छह महीने से एनआरसी की फाइनल लिस्ट के नोटिफ़ाई होने का इंतज़ार कर रहे हैं। जिसके बाद वो लोग अपने दस्तावेज़ों के आधार पर फॉरेनर्स ट्राइब्यूनल में अपील कर पाएंगे. ये लोग अपनी ज़मीन के रिकॉर्ड, पुरानी वोटर लिस्ट वगैरह लेकर तैयार बैठे हैं। अधिकतर लोग अपने पास मौजूद सभी काग़ज़ात का पहले ही इस्तेमाल कर चुके हैं।

 

असम में एनआरसी से बाहर मोहम्मद फखरुद्दीन ने कहा, अपील का मौका आना अभी बाकी है. हमें नहीं पता हमें फाइनल लिस्ट से बाहर क्यों किया गया. हम अब और परेशान और भ्रमित हैं कि जो कागजात हमारे पास हैं वो काम करेंगे या नहीं हमने सबकी सर्टिफ़ाइड कॉपी तैयार रखी हैं।

फिलहाल असम की एनआरसी लिस्ट ठंडे बस्ते में पड़ी है। क्योकि केंद्र सरकार चाहती है कि इस एनआरसी लिस्ट को खारिज कर दिया जाए या इसे फिर से तैयार किया जाए. वो ये भी चाहती है कि जिन हिंदुओं को बाहर किया गया है उन्हें नागरिकता क़ानून के रास्ते अंदर ले लिया जाए। इस को लेकर तमाम सवाल खड़े हो रहे है।

वही इस मामले को लेकर गुवाहाटी हाइकोर्ट के वकील सैयद बुरहानुर रहमान ने कहा की जब मीडिया बता रहा है कि ज़मीन के कागज़ात और अन्य काग़ज़ात स्वीकार नहीं किए गए तो इससे चिंता तो बढ़ेगी ही लेकिन एक रास्ता है. अगर ज़मीन के दस्तावेज़ 1971 से पहले के हों तो उनकी सत्यता साबित करनी पड़ेगी।