बाबरी मस्जिद ढहाने वाले कारसेवक रहे मोहम्मद आमिर उर्फ बलबीर ने अयोध्या फैसले को लेकर दिया बयान

बाबरी मस्जिद ढहाने वाले कारसेवक रहे मोहम्मद आमिर उर्फ बलबीर ने अयोध्या फैसले को लेकर दिया बयान

अयोध्या फैसला: 06 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस में हिस्सा लेने वाले मोहम्मद आमिर उर्फ बलबीर सिंह ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के ‘खैरात’ वाले बयान को लेकर जवाब दिया है। आपको बता दें मोहम्मद आमिर उर्फ बलबीरपूर्व में शिव सेना के एक नेता हुआ करते थे। वो आरएसएस की विचारधारा से प्रेरित थे और अपने शुरुआती दिनों के दौरान पानीपत की ‘शाखा’ में नियमित रूप से जाते थे। आज वे मुहम्मद आमिर के नाम से जाने जाता है, जबकि उसका सहयोगी योगेंद्र पाल का नाम अब मुहम्मद उमर है।

मोहम्मद आमिर उर्फ बलबीर सिंह ने AIMIM प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी के उस बयान का जवाब देते हुए कहा है की 5 एकड़ जमीन हमें खैरात नहीं बल्कि मुआवजे में मिली है। आपको बता दें मोहम्मद आमिर उर्फ बलबीर सिंह ने बाबरी मस्जिद गिराने के बाद इस्लाम काबुल लिया था और वे बलबीर सिंह से मोहम्मद आमिर बन गए थे।

बता दें सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को अयोध्या मामले पर फैसला सुनाया है. फैसले में अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में मस्जिद निर्माण के लिए 5 एकड़ जमीन मुहैया कराने का बंदोबस्त किया जाए. वही कोर्ट के इस फैसले को लेकर ओवैसी ने नाराजगी जाहिर की और कहा कि मुस्लि’म समाज अपने कानूनी हक की लड़ाई लड़ रहा है और उसे कतई किसी खैरात की जरूरत नहीं है।

वही ओवैसी ने एक बयान में कहा, की हम लोग अपने कानूनी हक की लड़ाई लड़ रहे हैं. मेरे खयाल से हमें 5 एकड़ जमीन का प्रस्ताव ठुकरा देना चाहिए. हमें किसी सरपरस्ती की जरूरत नहीं है। असदुद्दीन ओवैसी की इस तीखी प्रतिक्रिया के एक दिन बाद मोहम्मद आमिर ने जवाब देते हुए कहा है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को जो जमीन मस्जिद बनाने के लिए मिली है, वह खैरात नहीं बल्कि मुआवजा है।

आपको बता दें, 1 दिसंबर 1992 को मोहम्मद आमिर उन कारसेवकों में शामिल थे जो पूरे देश से अयोध्या पहुंचे थे. उसी साल 6 दिसंबर को, जैसा कि आमिर बताते हैं, वे बाबरी मस्जिद के गुंबद पर चढ़ने वाले पहले शख्स थे. बाद में जव वे अपने गांव पहुंचे थे, तब उनका किसी नायक की तरह स्वागत किया गया था।

अब मोहम्मद आमिर ने शादी एक मुस्लि’म महिला से शादी कर ली है. और मोहम्मद आमिर एक स्कूल चलाते हैं और इस्लाम के संदेश लोगों तक पहुंचाते हैं. आपको बता दें मोहम्मद आमिर और मोहम्मद उमर व एक अन्य कारसेवक जिन्होंने बाबरी विध्वंस में हिस्सा लिया था इस तीनो ने मिलकर अब तक 100 से ज्यादा मस्जिदों का निर्माण कराया हैं।

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