बड़ी ख़बर: कृष्णानंद राय ह’त्याकांड में ‘मुख्तार अंसारी’ समेत सभी आरोपी बाइज्ज़त बरी

अभी-अभी उत्तर प्रदेश से एक बड़ी खबर आ रही है, एएनआई के न्यूज़ हवाले से खबर है कि दिल्ली के स्पेशल कोर्ट ने कृष्णानंद राय ह’त्याकांड केस में मुख्तार अंसारी समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया है. आपको बता दें कि बाहुबली मुख्तार अंसारी का किसी ज़माने में एक अलग ही रतवा हुआ करता था. इसी वजह से बसपा ने उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था.

इसके बाद मुख्तार अंसारी का वोट बैंक और उनकी भजन धारी को देखते हुए पार्टी को मजबूरी वश दोबारा उन्हें टिकट देना पड़ा, और उन्होंने सपा सपा से चुनाव भी लड़ा था आपको बता दें कि बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी पांच बार विधायक चुने गए थे. यह मऊ निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आता है.

बहुजन समाज पार्टी के एक दमदार विधायक के रूप में मुख्तार अंसारी ने अपना नाम कमाया, और लगातार 5 बार वह अपनी जीत पर कायम रहे थे. सबसे पहली बार 1996 में उन्होंने बसपा से चुनाव जीता था. फिर इसके बाद 2002 में और 2007 में किसी कारणवश निर्दलीय होकर इन्होंने चुनाव लड़ा, और निर्दलीय उम्मीदवार होने के बावजूद भी उन्होंने भारी-भरकम वोटों से अपनी जीत दर्ज कराई थी.

इसके बाद फिर 2007 में ही उनको व सपा ने अपनी पार्टी में शामिल कर लिया था. फिर इसके बाद 2009 के लोकसभा चुनाव में बसपा ने इन्हें वाराणसी के सीट से टिकट दिया था, जो की कि बसपा की उस वक्त बहुत बड़ी गलती रही और वह वहां से चुनाव जीतने में असफल रहे.

फिर एक बार और 2010 में मुख्तार अंसारी को अपनी बाहुबल गतिविधियों के कारण बहुजन समाज पार्टी ने बाहर का रुख दिखा दिया था. फिर इसके बाद मुख्तार अंसारी ने अपने भाइयों के साथ मिलकर खुद की अपनी पार्टी का गठन किया, जिसका नाम रखा गया कौमी एकता दल.

आपको बता दें कि एक बार फिर से 2012 में मऊ की सीट से मुख्तार अंसारी विधायक चुनकर आए, और उन्होंने अपनी पार्टी कौमी एकता दल का विलय बसपा मैं कर लिया, इस तरह से वह 5 बार विधानसभा चुनाव में विधायक बने.