मुंबई बिल्डिंग हादसा: सरकारी लचर व्यवस्था की वजह से 2 बेटों के डे’थ सर्टिफिकेट और जना’ज़े के इंतजाम में उलझ गया एक मजबूर बाप, पत्नी का भी कोई भरोसा नहीं

मुंबई: दक्षिण मुंबई के डोंगरी इलाके में चार मंजिला रिहायशी इमारत के गिरने से हुए हाद’से में मर’ने वालों की संख्‍या बढ़कर 14 पहुंच गई है। राहत एवं बचाव कार्य बुधवार को भी जारी हैं। बचावकर्मियों ने मलबे से बुधवार को तीन श’व और निकाले बचाव कार्य में जुटे एनडीआरएफ के मुताबिक इस हादसे में मर’ने वालों में 7 पुरुष, 4 महिलाएं और 3 बच्‍चे शामिल हैं। वही हाद’से में 18 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है जिन्‍हें उपचार के लिए अस्‍पताल भेजा गया है, जबकि स्थानिये लोगो के मुताबिक अभी 40 से ज्यादा लोगों के मलबे में दबे होने की बात कही जा रही है।

डोंगरी स्थित केसरबाई बिल्डिंग हाद’से में कई जिदंगियां तबाह हो गईं। डोंगरी हाद’से के बाद एक पीड़ित परिवारों की हालत ऐसी हो गई है कि उन्हें अपने बच्चो को खोने का गम तक जाहिर करने की भी मोहलत नहीं मिल पा रही। पीड़ि’त अस्पताल से लेकर डे’थ सर्टिफिकेट बनवाने तक कई ऐसी फजीहतो में फसा हैं जो उनके दुखों को और गहरा बना रहे हैं।

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जी है 28 साल के रशीद इदरीश ने अपने दो मासूम बच्चों अपने सामने इस हाद’से में खत्म होते हुए देखा है। लेकिन बेबस पिता कुदरत की इस मार को खड़ा होकर देखता ही रह गया इस हादसे में दो बच्चो की मौ’त हो गई है और पत्नी जे जे अस्पताल में जिंदगी और मौ’त के बीच लड़ रही है। उस बेबस पिता के सामने परिस्थितियां ऐसी हैं कि उन्हें एक जगह ठहरकर अपने मासूम बच्चों की यादों को सहेजने की भी फुरसत नहीं मिल रही है।

आपको बता दें इदरीश पेशे से मजदूर है और भूखे-प्यासे अस्पताल में अपने बच्चों अरबाज 7 और शहजाद 9 के मृ’त्यु प्रमाण पत्र के लिए दर दर भटक रहा है ऊपर से घाय’ल पत्नी अलीमा बानो की चिंता अलग से। मुंबई के जेजे अस्पताल में सरकारी प्रक्रियाओं को पूरा करने के अलावा इदरीश के सामने बच्चों के श’वों को रखने के लिए ताबूत का भी इंतेजाम करना था।

आखिर बेबस पिता करे तो क्या करे इदरीश को अपने बच्चो के श’वों को लखनऊ स्थित अपने गांव ले जाने के लिए भी करीबन 50,000 रुपये इकट्ठा करने का इंतजाम करना है क्योकि गाड़ी वाले ने मुंबई से लखनऊ तक जाने के लिए 50 हजार रूपए का खर्चा बताया है। इसके अलावा इदरीश को पुलिस की जांच-पड़ताल में भी शामिल होने की चुनौती बनी रही।

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बता दें इस हादसे के दौरान इदरीश की पत्नी अलीमा और उनके दो बच्चे मलबे में दब गए थे। करीब 18 घंटो की मसक्कत के बाद उन्हें पांच बजे सुबह निकाला गया। हादसे में मां को गंभी’र रूप से घाय’ल है। जबकि दोनों बच्चों की मौ’त हो चुकी थी। अभी दो महीने पहले ही यह परिवार मुंबई शिफ्ट हुआ था।

इसी दौरान अलीमा के पथरी का ऑपरेशन भी हुआ। बच्चे अरबाज और शहजाद ने पिता की मदद के लिए स्कूल की पढ़ाई छोड़ दी थी। द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में इदरीश ने बताया मुझे नहीं पता था कि इमारत की हालत खस्ताहाल है या इसके मरम्मत की बात चल रही है। मुझे ब्रोकर ने भी नहीं बताया की बिल्डिंग खस्ताहाल है नहीं तो में यहाँ नहीं आता।

सुबह पांच बजे जब जेजे अस्पताल में दोनों बच्चों का श’व लाया गया तब इदरीश को पुलिस के साथ अपना बयान दर्ज कराने जाना पड़ा। इसके बाद इसके बाद उसने ताबूत खरीदने और किराये के पैसों के लिए अपने दोस्तों को फोन करना शुरू किया। इस दौरान एक प्राइवेट एजेंट ने 18,000 रुपये में दोनों शवों को फ्लाइट के जरिए लखनऊ पहुंचाने की बात कही।

हालांकि एक घंटे के बाद सरकारी डॉक्टर ने इदरीश को आश्वस्थ किया कि उसके सारे इंतजाम अस्पताल फ्री में मुहैया कराएगा। जिसके बाद शाम के 7.25 की मुंबई-लखनऊ फ्लाइट से जाना तय हुआ। लेकिन, इस दौरान ट्रेवेल एजेंट ने बताया कि बच्चों के डे’थ सर्टिफिकेट में उनके बीच के नाम की स्पेलिंग गलत है और यह उन्हें हवाई जहाज से ले जाने में परेशानी खड़ी कर सकता है। जिसको लेकर इदरीश फिर से जेजे अस्पताल के चक्कर काट रहा है।