हुज़ूर (स.अ.व.) ने फ़रमाया है जब किसी शख्श को मुसीबत और आज़माईश में मुब्तला देखें तो यह दुआ पढ़ें

हज़रत उमर रदी अल्लाह अन्हु से रिवायत है की रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया जो शख्स किसी को मुसीबत वा आज़माईश में मुब्तला देख कर ये दुआ पढ़े तो वो शख्स उस मुसीबत में कभी मुब्तला नही होगा|

الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي عَافَانِي مِمَّا ابْتَلاَكَ بِهِ وَفَضَّلَنِي عَلَى كَثِيرٍ مِمَّنْ خَلَقَ تَفْضِيلاً

अल्हम्दुलिल्लाही अल्लज़ी आफ़ानी मिम्मब तलाका बिही वा फद्दलनी आला कसिरिन मिम्मान खलक़ा तफदिला

तमाम तारीफ उस ज़ात(अल्लाह) के लिए है, जिसने मुझे इस मुसीबत से निजात दी, जिसमे तुझे मुब्तला किया और मुझे अपनी अक्सर मखलूक़ पर फ़ज़ीलत दी. अत-तबरानी , 729 , हसन अल-बैहिक़ी, 472-हसन

अल क़ुरान : ईमान वाले तो वो ही हैं जब अल्लाह सुबहानहु का नाम आए तो उनके दिल डर जाए और जब उसकी आयतें उन पर पढ़ी जाए तो उनका ईमान ज़ियादा हो जाता है, और वो अपने रब पर भरोसा रखते हैं.वो जो नमाज़ क़ायम करते हैं और जो हमने उन्हे रिज़क़ दिया है उसमें से खर्च करते हैं. यही सच्चे ईमान वाले हैं|

और उनके रब के यहाँ उनके लिए दर्जे हैं और बखशीश है और ईज्ज़त का रिज्क है. अल क़ुरान, सुराह अनफाल (8), आयत 2-4

हदीस: अबू हुरैरा रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की रसूल अल्लाह सलअल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया सात तरह के लोग हैं जिन्हे अल्लाह सुबहानहु अपने (अर्श के) साए में पनाह देगा उनमें से एक वो भी है जिसने तन्हाई में अल्लाह सुबहानहु को याद किया तो उसकी आँखों से आँसू जारी हो गये. सही बुखारी, जिल्द 7, 6479

Al Quran : The believers are only those who, when Allah is mentioned, feel a fear in their heartsand when His Verses (this Qur’an) are recited unto them, they increase their Faith, And they put their trust in their Lord (Alone); Who perform As-Salat (Iqamat-as-Salat) and spend out of that We have provided them.

It is they who are the believers in truth. For them are grades of dignity with their Lord, and Forgiveness and a generous provision (Paradise). Al Quran, Surah Anfal 8, Verse: 2-4

Hadith: Narrated by Abu hurairah Radi Allahu Anhu The Prophet Peace be upon him said ALLAH will give shade to seven (types of people) under His Shade (on the Day of Resurrection). (one of them will be) a person who remembers ALLAH and his eyes are then flooded with tears. Sahih Bukhari, Vol 8, Book 76, #486