बाबरी मस्जिद मामले में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अपना रुख किया साफ़, मीटिंग में लिया गया फैसला

देश में मुसलमानों के सबसे बड़े संगठन ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अयोध्या मामले में अपने रुख को लेकर विचार विमर्श कर लिया है. अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित मध्यस्थता कमेटी में पक्ष रखने के लिए बोर्ड ने अपना रुख तय कर लिया है. बोर्ड के कार्यकारिणी सदस्यों और सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में मुस्लिम पक्ष रख रहे अधिवक्ताओं की रविवार को नदवा कॉलेज में आपात बैठक बुलाई गई थी जिसमें इस मामले पर करीब पांच घंटे तक मंथन किया गया.

बोर्ड को 27 व 29 मार्च को मध्यस्थता कमेटी के साथ होने वाली बैठक में अपना पक्ष रखना है. बोर्ड ने यह बैठक काफी गुप्त तरीके से रखी और इससे मीडिया को पूरी तरह से दूर रखा गया. अयोध्या मामले में मध्यस्थता कमेटी की पहली बैठक 27 और फिर अगली बैठक 29 मार्च को होनी हैं.

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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने बैठक में मुस्लिमों का अयोध्या मामले में पक्ष रखने के लिए रूपरेखा तैयार कर ली है. इसी के लिए कार्यकारिणी सदस्यों की आपात बैठक बुलाई गई थी जिसमें बैठक की अध्यक्षता बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना सैयद राबे हसनी नदवी ने की.

वही इस बैठक में बोर्ड के उपाध्यक्ष मौलाना जलालुद्दीन उमरी, महासचिव मौलाना वली रहमानी और प्रवक्ता मौलाना खलीलुर्रहमन सज्जाद नोमानी सहित लगभग सभी सदस्य उपस्थित रहे. भरोसेमंद सूत्रों से जानकारी मिली है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड अयोध्या मामले में अपने पुराने रुख पर कायम रह सकता है.

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बोर्ड का कहना है कि विवादित जमीन मस्जिद की है और इस बार कोई दूसरी इमारत नही बन सकती है. बैठक में हुई चर्चा को लेकर सभी सदस्य चुप्पी साधे रहे लेकिन बोर्ड ने सदस्यों के साथ ही सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ताओं के साथ मंथन कर अपना रुख साफ कर लिया है.

हालांकि इससे पहले बोर्ड कई मौकों पर कहता रहा है कि सुप्रीम कोर्ट जो भी फैसला देगा उसे वो मानेगा. आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त मध्यस्थता कमिटी में श्री श्री रवि शंकर, रिटायर्ड जस्टिस कलीफुल्ला और वकील श्रीराम पंचू शामिल है और इसकी अध्यक्षता रिटायर्ड जस्टिस कलीफुल्ला करेंगे.