VIDEO: Article 370 हटाने के फैसले का मुस्लि’म उलेमा ने किया स्वागत, PoK को भारत में मिलाने के लिए पीएम मोदी से मांगी 3 दिन की छूट

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद धारा 370 यानी Article 370 और 35A को हटाने के मुद्दे पर अब प्रधानमंत्री मोदी को मुस्लि’म संगठनों का भी साथ मिलने लगा है। ऑल इण्डिया उलेमा बोर्ड ने पीएम मोदी के इस कदम को ऐतिहासिक बताते हुए कहा है, कि यह फैसला बहुत सही और ऐतिहासिक है ऐसा फैसला आज से पहले किसी ने नहीं किया और फैसला हिन्दुस्तान को आगे बढ़ाने के लिए बिलकुल सही है। उलेमा ने यह भी कहा कि जो कश्मीर की ज़मीन पाकिस्तान के पास है उसे भी वापस लिया जाए और यह काम पीएम मोदी मुस्लि’म समाज को दें हम 3 दिन के अंदर PoK को वापस हिन्दुस्तान में मिला देंगे।

मुस्लि’म उलेमाओं और मुसलमा’नो को पीएम मोदी के इस फैसले में सहमत होने और आगे साथ देने का कदम बहुत बड़ा है, खास कर ऐसे वक़्त में जब जम्मू कश्मीर मुद्दे को लेकर विपक्षी दल बंटे हुए हैं। और वे केंद्र सरकार के इस कदम को गलत ठहराते हुए परहेज नहीं कर रहे हैं। ऑल इण्डिया उलेमा बोर्ड ने एक बयान में कहा है, कि पकिस्तान और चीन की फितरत एक समान है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर को लेकर जो कदम उठाए हैं वे देशहित में हैं।

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ऑल इण्डिया उलेमा बोर्ड के उपाध्यक्ष नूर उल्लाह युसूफ जई ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि, यदि उन्हें मुस्लि’मों को 3 दिन का वक्त दे दिया जाए तो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर PoK को भी अपने हिस्से में जोड़ लिया जाएगा. पाक अधिकृत कश्मीर पर कब्जा करते हुए उसे भारत में जोड़ने का काम मुस्लि’म समाज के लोगों के स्तर से ही किया जाएगा।

आपको बता दें की कश्मीर के 1948 में भारत में शामिल होने के बाद आर्टिकल 370 को कश्मीर में लागू किया था जो इस राज्य को स्वायत्तता का दर्जा देता था और जिसकी वजह से कश्मीर में कुछ विशेष कानून भी लागू होते थे भारत में इसे हटाने की मांग कई बार की जा चुकी थी।

 

दरअसल संविधान में आर्टिकल 370 के संशोधन की स्थिति पर साफ साफ कुछ नहीं कहा गया था. इसी का फायदा उठाते हुए भारत सरकार ने यह कदम उठाया है। 35 A क्या है? बता दें की 35A से जम्मू-कश्मीर राज्य के लिए स्थायी नागरिकता के नियम और नागरिकों के अधिकार तय होते हैं जिसमे यह निम्न कानून है।

14 मई 1954 के पहले जो कश्मीर में बस गए थे वही स्थायी निवासी स्थायी निवासियों को ही राज्य में जमीन खरीदने सरकारी रोजगार हासिल करने और सरकारी योजनाओं में लाभ के लिए अधिकार मिले हैं। किसी दूसरे राज्य का निवासी जम्मू-कश्मीर में जाकर स्थायी निवासी के तौर पर न जमीन खरीद सकता है ना राज्य सरकार उन्हें नौकरी दे सकती है।

अगर जम्मू-कश्मीर की कोई महिला भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से शादी कर ले तो उसके अधिकार छिन लिया जाता था। हालांकि पुरुषों के मामले में ये नियम अलग है।