राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के अध्यक्ष का बड़ा ऐलान, यूपी की इन 19 सीटों पर उतारेंगे अपने प्रत्याशी

सभी रजनीतिक दलों की लोकसभा चुनाव के लिए तैयारियां आखिरी दौर में है. जल्द ही 17 वीं लोकसभा के लिए पहले चरण का मतदान होने वाला है. दिल्ली तक पहुंचने के लिए यूपी का किला फतह करना जरुरी होता है, क्योंकि यूपी में सबसे ज्यादा 80 लोकसभा सीटें है जिनके परिमाण ही काफी हद तक केंद्र की सत्ता का रास्ता बनाते है. यही वजह है कि बीजेपी को रोकने के लिए सपा और बसपा साथ में आए है.

समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी गठबंधन करके यूपी के चुनावी मैदान में उतरे है. लेकिन अब इस गठबंधन की मुश्किलें बढती हुई नजर आ रही हैं. दरअसल राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल ने इस गठबंधन पर कई गंभीर आरोप लगाए है. साथ ही मुस्लिमों की अनदेखी करने का मुद्दा भी उठाया है.

राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के अध्यक्ष आमिर रशादी का कहना है कि सपा-बसपा को मुसलमानों से कोई लेना-देना नहीं हैं. वह मुस्लिमों को सिर्फ वोट बैंक की तरह उपयोग करती रही है. उन्होंने सनसनीखेज दावा करते हुए कहा है कि इन दोनों पार्टियों ने ने टिकट बेचने का धंधा करके करीब 1600 करोड़ रुपये कमाए हैं.

उन्होंने कहा कि अब जीत-हार का उन पर कोई फर्क नहीं पड़ता है. इसलिए वो यूपी की 19 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने जा रहे है. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करके उन्होंने यह जानकरी दी. साथ ही कांग्रेस व बीजेपी पर भी मुसलमानों की उपेक्षा करने के आरोप लगाए.

रशादी ने दावा करते हुए कहा कि अगर सपा और बसपा अध्यक्षों का नारको टेस्ट करा लिया जाए तो पता चल जाएगा कि उन्होंने सीटें बेचकर कितने रुपये कमाए है. इस मामले को चुनाव आयोग को संज्ञान में लेना चाहिए. रशादी ने कहा कि अभी तक मुस्लिमों को बीजेपी का डर दिखा कर राजनीतिक दल उनका वोट हथियाते रहे हैं.

लेकिन अब यह स्थिति नहीं रहेगी. इस दौरान उन्होंने बताया कि मुरादाबाद, संभल, कुशीनगर, जालौन-उरई, झांसी, हमीरपुर, बांदा-चित्रकूट, फूलपुर, अम्बेडकरनगर, श्रावस्ती, महराजगंज, देवरिया, लालगंज, आजमगढ़, घोसी, जौनपुर, मछलीशहर, चंदौली और राबर्ट्सगंज में कौंसिल ने अपने उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है.

इसके अलावा राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल बिहार, झारखंड, दिल्ली और महाराष्ट्र में भी चुनाव लड़ने वाला है. उन्होंने बताया कि उन्हें कई संगठनों का समर्थन मिल चुका है. उन्होंने बसपा र निशाना साधते हुए कहा कि बसपा अध्यक्ष मायावती ने गेस्ट हाउस कांड को भूलकर सपा के साथ गठबंधन किया.

उन्होंने अपने मान-सम्मान को ताक पर रखा है. इससे साफ पता चलता है कि इस गठबंधन में दाल में कुछ तो काला है. वहीं कांग्रेस को लेकर उन्होंने कहा कि हाल ही में प्रियंका गांधी वाड्रा मेरठ में भीम आर्मी के चंद्रशेखर से तो मिलने गईं लेकिन उन्हें कुछ सौ मीटर की दूरी पर बसे उन मुसलमानों की सुध नहीं आई जिनके घर जलाए गए थे.

उन्होंने कहा कि कोई भी कांग्रेस नेता गुड़गांव में पीड़ित मुस्लिमों से मिलने तक नहीं गया. सपा-बसपा ने सिर्फ मात्र 28 लाख संख्या वाले जाटों की पार्टी रालोद को तीन सीटें दीं है लेकिन उन्होंने मुस्लिम संगठनों से बात तक करना जरुरी नहीं समझा. अब भय और भीख से मुसलमान को कुछ नहीं मिलेगा, वे असलियत समझ चुके हैं.