मस्जिद के लिए मिल रही ज़मीन को लेकर फिर फँसा पेंच, अब इस बात को लेकर सहमत नहीं

सदियों पुराने अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की पीठ बीते 9 नवम्बर 2019 को सुबह 10.30 बजे अपना निर्णय सुनाया था। अदालत ने विवादित जमीन रामलला यानी राम मंदिर बनाने के लिए देने का फैसला सुनाये हुए मस्जिद के लिए अयोध्या में दूसरी जगह 5 एकड़ जमीन देने का आदेश राज्य सरकार को दे दिया था।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा राम मंदिर निर्माण के पक्ष में आये हुए फैसले के 88 दिन बाद केंद्र सरकार ने राम मंदिर ट्रस्ट के निर्माण का ऐलान कर दिया. वहीँ दूसरी ओर योगी कैबिनेट ने अयोध्या के सोहावल तहसील के धन्नीपुर गांव में सुन्नी वक्फ बोर्ड को जमीन देने का प्रस्ताव पास कर दिया।

अयोध्या से क़रीब 20 किलोमीटर दूर धन्नूपुर गांव मस्जिद की ज़मीन

लेकिन यूपी सरकार द्वारा जो जगह मस्जिद के लिए चिन्हित की गई है उससे आम मुसलमानों एवं अयोध्या के मुसलमानों मे नाराजगी देखने को मिल रही. देखा जा रहा है की वे इस जगह से नाखुश हैं।

जफ़रयाब जिलानी जो की ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य हैं इन्होने राज्य सरकार द्वारा मस्जिद के लिए दी गई जमीन के प्रस्ताब को लेकर सवाल उठाये हैं। जिलानी का कहना है, यह प्रस्ताव साल 1994 में संविधान पीठ के इस्माइल फ़ारूक़ी मामले में दिए गए फ़ैसले के ख़िलाफ़ है।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य ज़फ़रयाब जिलानी

उस फ़ैसले में यह तय हुआ था कि केंद्र द्वारा अधिग्रहित 67 एकड़ ज़मीन सिर्फ़ चार कार्यों मस्जिद, मंदिर, पुस्तकालय और ठहराव स्थल के लिए ही इस्तेमाल होगी। बुधबार को राज्य कैबिनेट की बैठक के बाद योगी सरकार के प्रबक्ता एवं कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ सिंह ने कहा की कैबिनेट की बैठक में पांच एकड़ ज़मीन का प्रस्ताव पास हो गया है।

हमने तीन विकल्प केंद्र को भेजे थे, जिसमें से एक पर सहमति बन गई है. यह ज़मीन लखनऊ-अयोध्या हाई-वे पर अयोध्या से क़रीब 20 किलोमीटर दूर है। बता दे कि राज्य सरकार ने दो अन्य ज़मीनों के जो प्रस्ताव भेजे थे वो अयोध्या-प्रयागराज मार्ग पर थे।

योगी सरकार मस्जिद के लिए पांच एकड़ ज़मीन सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर देने जा रही है. लेकिन अयोध्या के तमाम मुसलमान और इस विवाद में पक्षकार लोगों द्वारा इतनी दूर ज़मीन देने के प्रस्ताव का भी विरोध कर रहे हैं।

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